Gond Rajya Rani Durgavati Tak गोंड़ राज्य रानी दुर्गावती तक

गोंड़ लोगों का प्रसिद्ध स्थान गढा (मंडला) था। यहाँ के मोतीमहल में एक शिलालेख मिला है जिसमें गोंड़ राजाओं की वंशावली दी है। गोंड़ राजाओं ने सबसे पहले अपना राज्य…

Bundelkhand Me Muglon Ka Rajya बुन्देलखंड मे मुगलों का राज्य

विक्रम संवत्‌ 1600 मे शेरशाह ने कालिंजर पर आक्रमण किया और यहीं से Bundelkhand Me Muglon Ka Rajya आरम्भ हुआ।  राजसीन ( रायसेन ) का किला तो  शेरशाह के अधिकार…

Bhadeti Parampara भँड़ैती-परम्परा

बुन्देलखंड में भाँड़ों के लोकनाट्य को भँड़ैती या कहीं-कहीं नकल कहते हैं। Bhadeti Parampara का प्रचलन प्राचीन है, क्योंकि उसकी लोकधर्मी परम्परा ही नाट्यशास्त्रा में वर्णित ‘भाण’ उपरूपक के रूप…

Nautanki Parampara बुन्देलखंड में नौटंकी परम्परा

बुन्देलखंड में नौटंकी परम्परा Nautanki Parampara हाथरस से आई हाथरस एक  समय  मे लोक कला के पठन-पाठन और मुद्रण का केंद्र था ।  इस संचरण transmission का मुख्य कारण था…

Rang Ki Saugandh रंग की सौगन्ध

आहिस्ता-आहिस्ता मेरे कपोलों पर, मेरे वक्षस्थल पर रंग लेप किया फिर अपने रंग में रंगा देख कर खिलखिला पड़ी। बोली-“कितने अच्छे लग रहे हैं आप। आपसे एक निवेदन है, कि…

Bundeli Lok Sahitya बुंदेली लोक साहित्य

लोकसाहित्य लोकभाषा का वह साहित्य है, जो अपने अन्तर्निहित लोकत्व के कारण  लोकमान्य होकर लोकगृहीत हो गया हो और लोकमुख में जीवित हो। Bundeli  Lok Sahitya में लोकत्व के वे…

Bundeli Bhasha Aur Lok Sanskriti Ki Vivechna बुन्देली भाषा और लोक संस्कृति की विवेचना

लोकभाषा का विकास लोकभाषा की उत्पत्ति परिस्थितियों, उसके आदिकालीन स्वरूप और विकास के इतिहास के सम्बन्ध में साहित्य के इतिहासकारों और भाषाविदों में कई भ्रान्तियाँ हैं। Bundeli Bhasha Aur Lok…

Isuri Ka Jivan Parichay ईसुरी का जीवन परिचय

Bundelkhand की बुन्देली भाषा के विख्यात महाकवि ईसुरी ने फाग विधा  मे चौकड़िया फाग की रचना कर बुन्देली साहित्य को एक नई दिशा दी। महाकवि  का जीवन दर्शन और अध्यात्म…

Rani Bahu रानी बहू

“कछू नई। मायके की चरचा होन लगी सो अपने करम पै हमाए अँसुआ आ गए। ऐसी अभागन हैं हम कै न बाप, न मताई, न एकड़ भैया-बैन।” Rani Bahu ने…

Sadhak Kavi Ainsai साधक कवि ऐनसांई

Sadhak Kavi Ainsai का जीवन संतों-फकीरों और साहित्यकारों के सम्पर्क में व्यतीत हुआ। वे साधक कवि और समर्थ फकीर थे। उनका नाम ऐनल्ला पर उन्हें ऐन, ऐनानंद, ऐंनसाई और ऐनुल्लाह…