Lakaur Nritya लाकौर नृत्य

यह नृत्य भी बरात के डेरे में कन्या पक्ष की स्त्रियों द्वारा किया जाता है। लाकौर का सही शब्द लहकौर= लह$कौर अर्थात् ग्रास लेने का अर्थ रखता है। वर-वधू एक…

राछ बधाया नृत्य

विवाह-संस्कार में भी वरों के बाद कन्या पक्ष की स्त्रियाँ बरात में डेरे में जाती हैं और वहाँ वर पक्ष के संबंधी वधू का टीका करते हैं। इस अवसर पर…

बाबा/ जुगिया/ बंहडोल – लोक परंपरा

वर पक्ष की बरात जाने पर घर में स्त्रियाँ पुरूष-स्त्री बनकर स्वांग रचती हैं और नृत्य भी करती हैं। इस नृत्य को बाबा/ जुगिया/ बंहडोल Baba/Jugiya /Banhdol या बाबा-बाई का नृत्य…

बहू उतराई नृत्य- लोक परंपरा

बरात लौटने और बहू के घर आने पर बहू और वर को कइयाँ लेकर नृत्य किया जाता है, उसे बहू उतराई नृत्य कहते हें। वर-वधू के प्रथमागम पर उनकी आरती…

देवी-देवता पूजन नृत्य

वर-वधू को साथ लेकर देवी-देवता पूजन के बाद स्त्रियाँ बहू और वर को कइयाँ लेकर नृत्य करती हैं, जो अपनी सहजता और लोकाचार से जुड़ने के कारण देवी-देवता पूजन नृत्य…

चीकट नृत्य- लोक परंपरा

बुन्देलखण्ड मे विवाह के शुभावसर एक परंपरा, एक रस्म बहुत प्रचलित जिसमें मामा-माईं द्वारा लायी भेंट को चीकट शर्बत पिलाकर, घी गुड़ खिलाकर उतारी जाती है और इस खुशी में…

सैरा पाई नृत्य

बुन्देलखण्ड का सैरा पाई नृत्य Saira Pai Nritya पुरुषप्रधान सामूहिक नृत्य है, जो सावन-भादों में वर्षा की झड़ी के साथ शुरू होता है। इसमें 10-12 वर्ष से 40-45 वर्ष की…

बधाया-बुन्देलखण्ड का लोक नृत्य

बधाया लाने या बुलौआ करवाने पर यह लोकनृत्य सामूहिक रूप में स्त्रियाँ करती हैं।  ढपले और नगड़िया के स्वरों पर स्त्रियों का एकल या सामूहिक नृत्य सहजता और उन्मुक्तता की…

दिवारी नृत्य-मौनियाँ/बरेदी नृत्य

दिवारी नृत्य को ही मौनियाँ नृत्य, अहीर या बरेदी  नृत्य कहते हैं। अन्तर यह है कि मौनियाँ से किसी अनुष्ठान का, दिवारी से त्यौहारी का संकेत मिलता है, जबकि अहीर…

होली-बुन्देलखण्ड का लोक नृत्य

होली के अवसर पर राग-रंग और आनन्द के क्षणों में होरी नृत्य करने की परम्परा है। होली-बुन्देलखण्ड का लोक नृत्य Holi-Bundelkhand Ka Lok Nritya अधिकतर सामूहिक होता है। युवा वर्ग होली…