Bundeli Lok-Katha Parampara बुन्देली लोक-कथा परम्परा

बुन्देलखंड की लोककथा लोक द्वारा लोक के लिए लोक से कही जाती है। गाँवों की अथाई में नीम या बरगद के नीचे रात की ब्यारी (Dinner) के बाद, लोककथा कहने-सुनने…

Bundeli Ka Udbhav aur Vikas बुन्देली का उद्भव और विकास

बुन्देलखण्ड का अपना पौराणिक स्थान है। बुन्देलखण्ड में लोकभाषा में सृजन 11वीं शती से होने लगा था और बुन्देली का उद्भव और विकास 982 ई. या 10वीं शती के अन्तिम चरण…

Isuri Ke Ram ईसुरी के राम

मथुरा बृंदावन से वापस आकर महाकवि ईसुरी एक वर्ष तक चित्रकूट में रहे और वहाँ अनेक सतसंगों के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीलाओं को सुना गुना और फिर…

ईसुरी की संयोग श्रंगारिक फागें

Bundelkhand के महाकवि ईसुरी ने संयोग श्रंगारिक फागों मे जहां नायिका के शरीर शौष्ठव का वर्णन किया है। वही नायिका ने नेत्रों की व्याथा का सौंदर्यबोध का वर्णन भी किया है।…

ईसुरी का सौंदर्य श्रृंगार

महाकविईसुरी नें अति सौंदर्य श्रंगार में कुछ फागे लिख डाली। जिन्हें कुछ लोगों ने अश्लील साहित्य के रूप में प्रचारित किया और महाकवि ईसुरी Mahakavi Isuri को विवादों के पटल…

महाकवि ईसुरी

बुन्देली  के विख्यात महाकवि ईसुरी ने फाग विधा  मे चौकड़िया फाग की रचना कर बुन्देली साहित्य को एक नई दिशा दी। ईसुरी का जीवन दर्शन और अध्यात्म ही उनका परिचय…

बुन्देलखण्ड एक परिचय

बुन्देलखण्ड भारत का हृदय है। Bundelkhand heart of India. आजकल जिसे बुन्देलखण्ड कहते हैं, परंतु पूर्व में इसे दशार्ण, जेजाभुक्ति और  जुझौति कहते थे। यहाँ पर बहुत समय तक  बुंदेला…

बुन्देली झलक

बुन्देली झलक की स्थापना नवंबर 2018 में हुई। बुन्देली झलक के संस्थापक गौरीशंकर रंजन ने कीर्तिशेष आदरणीय श्री गुणसागर शर्मा ‘सत्यार्थी’ ( वरिष्ठ साहित्यकार, बुन्देली लोकविद)  और आदरणीय श्री सुरेश…