किस्सा सी झूठी न बात सी मीठी। घड़ी घड़ी कौ विश्राम, को जाने सीताराम। न कहय बाले को दोष, न सुनय बाले का दोष। दोष तो वहय जौन किस्सा बनाकर…
Category: बनाफ़री लोक कथाएं

राजा के लड़के और नेवला-बनाफरी लोक कथा
बुन्देलखण्ड की समृद्ध लोक परंपरा में बनाफरी लोककथाओं का विशेष स्थान है। ‘राजा के लड़के और नेवला’ बनाफरी लोककथा की ऐसी कथा है, जिसमें लोकजीवन, मानवीय भावनाओं, बुद्धिमत्ता और नैतिक…
राजा की लड़की नाई का श्राप-बनाफरी लोक कथा
बुन्देलखण्ड की लोकसाहित्य परंपरा में बनाफरी लोककथाओं का अपना विशिष्ट महत्त्व है। ये लोककथाएँ क्षेत्र की लोकभाषा, जनजीवन, सामाजिक मान्यताओं और पारंपरिक कथावाचन शैली का परिचय कराती हैं। ‘राजा की…
पंडित पंडिताइन-बनाफरी लोक कथा
एक रहय पंडित एक रहय पंडिताइन। पंडित दिन भर भिक्षा मांगते थे फिर भी दिन भर के लिए खाने को नही ला पाते थे। तो एक दिन पंडिताइन ने कहा…
निपूत राजा और जेठ पुत्र- बनाफरी लोक कथा
एक रहै राजा, उसके चार रानियाँ थीं, तो उनमें से किसी के लड़का नहीं होता था। एक दिन उनके घर एक बाबा आया, उसने पुँछा- बच्चा के मकान में को…
निपुत्री राजा-बनाफरी लोक कथा
एक रहय निपुत्री राजा Niputri Raja यानी उसके कोई बालक नहीं था। सो जमादारिन झाड़ू लगाने आती तो वह रोजाना अपने द्वारे पर बैठा मिलता। तो वह कहती, है- निपुत्री,…
उजबासा रानी-बनाफरी लोक कथा
एक रहय राजा एक रहय रानी। राजा ने कहा, होय न होय रानी हम भी पुण्य का कोई काम करें। रानी ने कहा, ठीक है। राजा ने कहा, होय न…
