कहमुकरी (मुकरियाँ ) छंद विधान

मुकरिया Mukariyan एक लोक छंद है, इसको ‘अमीर खुसरो’ जी ने बहुत लिखा था। अमीर खुसरो जी फारसी भाषा कवि / शायर थे , इसलिए उन्होनें इस छंद को फारसी…

बुन्देली का स्वरूप और विशेषताएं

बुन्देली का शुद्ध क्षेत्र या मध्यवर्ती क्षेत्र बुंदेली बोली विस्तृत भू-भाग की स्वामिनी है। उसका अपना विशाल प्रसार क्षेत्र है, Bundeli Ka Swaroop Aur Visheshtayen  बुन्देली का स्वरूप और विशेषताएं…

बुंदेली के क्षेत्रीय रूप

बुन्देली एक विस्तृत भू-भाग की भाषा है। विस्तृत रूप होने के कारण इसमें क्षेत्रीय स्तरों पर सांस्कृतिक विचारों, परम्पराओं मान्यताओं, रीति-रिवाजों आदि का आदान-प्रदान होता है। Bundeli Ke Kshetriya Roop…

नाग-नागिन बुन्देली लोक कथा 

पूतगुलाखरी ने देखो कै एक लरका अपने गरे में एक मरी नागन डारें है, अर चिचया रओ है कै हाय मोरी नागन तें काँ गई ।नाग-नागिन Nag Nagin के किस्सा…

धोखेबाज मंत्री- बुन्देली लोक कथा

ऐसई ऐसे विजेगढ़ राज में सोमनाथ नाव के एक राजा हते । वे सबई बातों में अच्छे हते, अपनी रैयत खाँ बाल बच्चों जैसो मानत हते। एक बेर उन राजा…

प्रण (प्रतिज्ञा )-बुन्देली लोक कथा

एक समय की बात है कै इते के राजा के कुँवर अपने घोड़ा पै बैठकें शिकार खेलवे जा रये हते। वे अपनो घोड़ा दौड़ात जा रयेते सो वे दूसरे राजा…

तुरत दान महापुन्न

येई नगर में एक गरीब बामन राततों बो अपने परवार को पालन भीक मांगकें करततो। कछू दिनों तक ऐसई चलो फिर इनकें एक कन्या को जनम भव । वामन की…

चौंतरा पे बंदी दो लुगाई

पटैल बब्बा के संगेवारों एक गाँव में सौदा सामान लैवे गव सो वो का देखत हे कै एक Chontara Pe Bandi Do Lugai चौतरा पे बंदी दो लुगाई  दोई हतकड़ी…

का करौं कैसो करों – बुन्देली लोक कथा

पूतगुलाखरी पटैल बब्बा सें पूछवे गये के बब्बा एक महल में जनी मारी डरी ती और आदमी जोर-जोर से चिल्या रये हतें Ka Karfen Kaiso Karon ‘का करों, कैसो करों’…

करो अर करकें न जानों-बुन्देली लोक कथा 

एक बेर की बात है के कौनऊ गाँव चौगड्डा पे एक लुगाई की लास डरी हती। ओकी घींच धड़ के संगे ने हती। दिन डूबे उतई से चार बाईचारें निकरीं…