Kanhda Parampara काँड़रा-परम्परा

बुन्देलखंड का काँड़रा राई की तरह मूलतः नृत्य ही है, लेकिन भक्तिकाल के दौरान 16वीं शती के उत्तरार्द्ध और 17वीं शती के पूर्वार्द्ध में जब रासलीला को उत्कर्ष मिला, तब…

Bundelkhand Ke Loknritya बुन्देलखण्ड के लोकनृत्य

बुंदेलखंड में विभिन्न लोकनृत्यों का प्रचलन है। बुंदेली लोक नृत्य में विभिन्न प्रकार के गीतों का गायन होता है। बुंदेलखंड में लोकप्रिय लोकनृत्य मे बधाई नृत्य, बरेदी नृत्य, होली नृत्य,…

Bundelkhand Ka Lok Jivan बुन्देलखण्ड का लोक जीवन

Bundelkhand ki Mamuliya बुन्देलखंड की मामुलिया/महबुलिया

बुन्देलखंड की बालिकाओं का खेलपरक पर्व मामुलिया/महबुलिया       बुन्देलखंड मे मामुलिया के इस खेल में बालिकायें बेर अथवा बबूल की एक कँटीली टहनी लेती हैं और उसे किसी…

Bundelkhand Ka Tesu बुन्देलखंड का टेसू

बुन्देलखण्ड मे बच्चे  बांस और लकडी की डंडी, मिट्टी आदि से हास्यात्मक आकृति के पुतले बनाते हैं और घर –घर जाकर टेसू के गीत गाते है। न्योछावर स्वरूप  मुहल्ले में…

Bundeli Jhinjhiya/ Dhiriya बुन्देली झिंझिया/ढिरिया

यह त्योहार बुंदेलखंड का खेल परक लोक पर्व है। Bundeli Jhinjhiya/ Dhiriya एक मटकी के ऊपरी भाग में चारों ओर छेद कर लिए जाते हैं। फिर आधे भाग में राख…

Naurata-Suata नौरता – सुआटा

Kanhda /Dhobiyai Nritya कानड़ा/धोबियाई नृत्य

बुन्देलखंड का Kanhda /Dhobiyai Nritya  मूलतः जातिगत नृत्य हैं। धोबी समाज के लोग इसे करते है। इसलिए कहीं-कहीं ये नृत्य धुबियाई नृत्य भी कहलाता है। काँनड़ा कान्हा (कृष्ण) से संबंधित…

Bundelkhand ki Rai बुन्देलखण्ड की राई  

Bundelkhand Ki Fag Gayki बुन्देलखण्ड की फाग गायकी

बुन्देलखण्ड की फाग गायकी एक लोककाव्य है, लोककाव्य का अपना काव्यशास्त्र होता है। अपनी भाषा, शब्द और छंदयोजना से लेकर भाव-विस्तार तक उसका अपना विधान होता है। उसमें एक लटकनिया…