लोकविश्वास है कि मानव का जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए उसे क्षणिक जीवन में सुखों का भोग कर लेना चाहिए। इस विश्वास को बुन्देली लोकगीतों में संयोग श्रृंगार Bundeli Lokgeeton Men…
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बुन्देली लोकगीतों में वियोग श्रृंगार
बुन्देलखण्ड के लोकगीतों में संयोग श्रृंगार का पक्ष जितना समृद्ध और भावमय है, उतना Bundeli Lokgeeton Men Viyog Shringar का नहीं। इसका कारण लोक का आशावादी स्वभाव और लोकमन है।…
Raiya रइया
बुंदेलखण्ड के सभी जिलों में प्रचलित Raiya रइया गायन शैली अधिक लोकप्रिय है। चक्की में अनाज पीसते समय और विवाह-संस्कार में गेहूँ बीनने या पापड़-बड़ी बनाने के अवसर पर रइया…
Kalgi-Turra कलगी-तुर्रा
चंदेरी राज्य के संत तुकनगिरि (मध्यदेशीय तुकनगीर) और फकीर शाह अली के बीच लावनी में शक्ति और शिव के पक्ष लेकर दर्शनपरक संवाद या दंगल होता था। एक बार राजदरबार…
Bundelkhand Ki Sair Lok Gayki बुंदेलखंड की सैर लोक गायकी
बुंदेलखण्ड में प्रचलित लोकरागिनी Bundelkhand Ki Sair Lok Gayki का उद्भव 18 वीं शती के उत्तरार्द्ध में हुआ था और वह 20 वीं शती के पूर्वार्द्ध तक लगभग दो सौ…
Bilavari बिलवारी – बुन्देली लोकगीत
खेतों में किसान की बोनी के समय Bilavari बिलवारी गायी जाती है। इसे पुरुष ही गाते हैं- एकल या युगल। इस अवसर पर खेत में दाना बोने के समय श्रम…
Chaiti Ya Dinari चैती या दिनरी
गेहूँ या चने की फसल काटते समय Chaiti Ya Dinari गायी जाती है। यह स्त्रियों का समूह गीत है। इस गीत का गायन भी विलंबित लय से शुरू होता है…
Javara-Bundelkhand Ka Lok Nritya जवारा-बुन्देलखण्ड का लोक नृत्य
चैत और क्वाँर की नौदेवियों के प्रारम्भ में मिट्टी के घटों में जौ डालकर जवारे बोये जाते हैं और नौ दिनों तक उनका पूजन होता है। रात्रि को भजन होते…
Parshuram Awasthi Ke Lokgeet परशुराम अवस्थी के लोकगीत
बुन्देलखण्ड की लोक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले Parshuram Awasthi Ke Lokgeet गाँव की चौपाल के लोकगीत हैं , आम जनमानस के लोक गीत हैं । इनके गाने का अंदाज…
Urmila Pandey Ke Lokgeet उर्मिला पाण्डे के लोकगीत
बुन्देलखण्ड स्वर कोकिला उर्मिला पाण्डे का जीवन परिचय मैया नैन बान दुर्गे मार रही हो माँ ( नवरात्रि भजन ) अल गरजें भरे बेलाताल, गागर मोरी न डूबे राम…
