Bundelkhand Ke Lok Devta बुन्देलखण्ड के लोक-देवता

Bundelkhand ke Tyohar बुन्देलखण्ड के त्यौहार

Bundelkhand ka Swang बुन्देलखंड का लोक नाट्य स्वाँग

बुन्देलखण्ड में लोकचेतना, लोकभाषा और लोकसाहित्य का उद्भव 9वीं शती में हुआ है। 9वीं शती में अनेक जन-जातियों (गौंड, कोल, भील आदि) थी उनका मनोरंजन कथा-वार्ता, लोकनृत्य एवं लोकनाट्य आदि…

Bundeli Vivah Sanskar बुंदेली विवाह संस्कार

सनातन धर्म मे विवाह को जीवन के एक अनिवार्य ‘संस्कार’ के रूप में माना जाता है। विवाह का आशय उत्तरदायित्व का निर्वाह करना है। पति-पत्नी के बीच जन्म जन्मांतरों का…

Bundeli Lokgeet Parampara बुन्देली लोकगीत परम्परा

बुन्देलखंड के लोकजीवन मे उद्भावित तरह- तरह के भावों से उत्पन्न रसानुभूति रचनाओं को जन्म देती  हैं। वही लोकसाहित्य की रचना होती रही है। लोक के धर्म में लोकादर्श, लोकनीति…

Bundeli Lok-gathayen बुन्देली लोक-गाथायें

लोक जीवन में लोक-गाथाएँ बड़े प्रेम और तन्मयता से गायी तथा सुनाई जाती है। यह कथा परक गीत होते हैं। इनमें कहानी गीत के माध्यम से आगे बढ़ती है। इस…

Bundeli Lok-Katha Parampara बुन्देली लोक-कथा परम्परा

बुन्देलखंड की लोककथा लोक द्वारा लोक के लिए लोक से कही जाती है। गाँवों की अथाई में नीम या बरगद के नीचे रात की ब्यारी (Dinner) के बाद, लोककथा कहने-सुनने…

ईसुरी की संयोग श्रंगारिक फागें

Bundelkhand के महाकवि ईसुरी ने संयोग श्रंगारिक फागों मे जहां नायिका के शरीर शौष्ठव का वर्णन किया है। वही नायिका ने नेत्रों की व्याथा का सौंदर्यबोध का वर्णन भी किया है।…

ईसुरी का सौंदर्य श्रृंगार

महाकविईसुरी नें अति सौंदर्य श्रंगार में कुछ फागे लिख डाली। जिन्हें कुछ लोगों ने अश्लील साहित्य के रूप में प्रचारित किया और महाकवि ईसुरी Mahakavi Isuri को विवादों के पटल…

महाकवि ईसुरी

बुन्देली  के विख्यात महाकवि ईसुरी ने फाग विधा  मे चौकड़िया फाग की रचना कर बुन्देली साहित्य को एक नई दिशा दी। ईसुरी का जीवन दर्शन और अध्यात्म ही उनका परिचय…