कन्हैया आठें

कृष्ण जन्माष्टमी को बुन्देली में कन्हैया आठें Kanhaiya Aathen कहा जाता है। कृष्ण जन्म का उत्सव सम्पूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है। श्री कृष्ण गाय तथा पशुओं के रखवाले हैं…

कुनघुसू पूने

आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा गुरू पूर्णिमा के नाम से जानी जाती है बुन्देलखण्ड में इसका एक स्वरूप भिन्‍न होता है यहाँ Kunghusu Poone कुनघुसू पूने भी कहते…

करवा चौथ

करवा चौथ एक पारंपरिक हिंदू व्रत है, जिसे विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी…

ऋषि पंचमी

स्त्रियाँ महाभारत काल के आख्यान के अनुसार इस व्रत को रखती हैं। उसमें श्रीकृष्ण ने युधिष्ठर को बताया था कि जो स्त्रियाँ रजस्वला स्थिति में गृह कार्य करती रहती हैं…

आस माई

बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को आस-माई Aas Mai की पूजा की जाती है। यह व्रत पुत्रवती स्त्रियाँ रखती हैं। इस व्रत का उद्देश्य अपने पुत्रों को…

अहोई अष्टमी

सभी हिन्दू जाति की सुहागिन स्त्रियों के लिये यह सुहाग रक्षा का महत्वपूर्ण व्रत है। यह प्रत्येक कार्तिक मास मे कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। अहोई अष्टमी Ahoee…

झांझी/ झिंझिया के गीत- बुन्देलखण्ड की लोकपरंपरा

बुन्देलखण्ड में टेसू के साथ-साथ झांझी या झिंझिया की परंपरा भी लोकजीवन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। जहाँ लड़कों की टोली में टेसू प्रमुख होता है, वहीं लड़कियों की टोली…

झांझी/ झिंझिया- बुन्देली लोक पर्व

बुन्देलखण्ड की लोकसंस्कृति में झांझी या झिंझिया बालिकाओं का एक अनूठा लोक पर्व है। यह पर्व लोकगीत, नृत्य, हस्तकला और बालिकाओं की रचनात्मक प्रतिभा का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।…

टेसू – बुन्देलखण्ड का लोक पर्व

टेसू Tesu बुन्देलखण्ड की एक विशिष्ट बाल लोकपरंपरा है, जो लोकगीतों, सामूहिक गायन, मनोरंजन और ऐतिहासिक लोकस्मृतियों से जुड़ी हुई है। यह मुख्यतः बालकों का खेलपरक लोक पर्व है, जिसमें…

मामुलिया-बुन्देलखण्ड का लोक पर्व  

मामुलिया, महाबुलिया, माहुलिया बुन्देलखण्ड की प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और लोकजीवन के रक्षक लोकपर्व हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। यहाँ के लोकपर्व केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि लोकमानस की भावनाओं,…