कभी कभी भ्रम में आकार इंसान बहुत कुछ खो देता है और उसे जब सच का भान होता है तो बहुत पछताता है इस लिए समय रहते भ्रम निवारण Bhram…
Category: बुन्देलखण्ड का सहित्य

How the folk literature and Hindi literature of Bundelkhand originated and developed and through which stages it reached here today.
पतिव्रता – बुन्देलखण्ड की लोक कथा
एक पतिव्रता Pativita नारी क्या नहीं कर सकती वो हर असंभव को संभव कर सकती है । किसी गाँव में एक ब्राह्मण रहता था। उसके एक लड़का था। माँ-बाप उसे…
तीन लाख की तीन बातें
एक राजा था। उसका लड़का बड़ा विद्याप्रेमी था। वह गुणी लोगों को हजारों रूपया देकर उनसे गुण सीखा करता था। राजकुमार ने तीन लाख की तीन बातें Teen Lakh Ki…
तीन भाई- बुन्देलखण्ड की लोक कथा
एक समय की बात है कि एक शहर मे तीन भाई Teen Bhai रहते थे और उसे शहर में एक जादूगरनी थी। वह रोज रात को बाज का रूप धरकर…
Ghar Ki Laxmi घर की लक्ष्मी-बुन्देलखण्ड की लोक कथा
किसी नगर में एक सेठ रहते थे। सब तरह से भाग्यवान थे। चार पुत्र, घर-गिरस्ती का काम संभालने वाली सुन्दर बहुएँ, धन-धान्य, गाड़ी-घोड़े, नौकर-चाकर सब कुछ था। किसी बात की…
Giddhpari गिद्धपरी-बुन्देलखण्ड की लोक कथा
राजकुमार ने बैल को छोड़ दिया और जब गीध आया तो उसने गिद्धपरी को देने के लिये वचन ले लिया। गीध बेचारा घर आया और उसने गिद्धपरी Giddhpari को सारा…
कौड़ी वाली रानी-बुन्देलखण्ड की लोक कथा
एक-एक कौड़ी जोड़कर खजाना भरने वाली रानी को कौड़ी वाली रानी Kaudi Vali Rani कहा जाने लगा । एक-एक कौड़ी जोड़कर इतनी बड़ी रियासत को चलाना हिम्मत की बात हैं। किसी…
करम-रेख -बुन्देलखण्ड की लोक कथा
मनुष्य जो कर्म करेगा वही फल पाएगा कर्म के हिसाब से करम रेख Karam Rekh बनती है वही जीवन का निर्धारण करती है । किसी नगर में एक सेठ और…
बुन्देली लोककथा का उद्भव और विकास
बुन्देलखण्ड की लोकसंस्कृतिक वैदिक संस्कृति से भी अधिक पुरानी है। वैदिक काल में यहाँ आर्य संस्कृति का प्रवेश नहीं हुआ था, क्योंकि उत्तर वैदिक साहित्य में ही नर्मदा नदी का…
केतकी के फूल- बुन्देली लोक कथा
एक बार किसी राजा की रानी स्नान करके धूप में बैठ अपने बाल सुखा रही थी। इसी समय सपरना की छत पर बैठे दो पक्षी सुआ-सारो आपस में बातचीत कर…
