ब्रज की रीत प्रीत गति न्यारी

ब्रज की रीत प्रीत गति न्यारी।। टेक।। कहि न सकत महिमा गुन सेसहु, शारद सकुचि समझि पचिहारी।। 1।। अगम निगम पढ़ि थके अगोचर, गावत ग्रन्थन विविध विचारी। पावत नहि परमारथ…

प्रीतम ! प्रीत न करिये, प्रीत किये दुःख होये

Pritam Preet Na Kariyo प्रीतम! प्रीत न करिये, प्रीत किये दुःख होये। सुन मन कंथ सुजान सुमन होय, प्रेम के फंद न परिये।। 1।। लोक वेद की राह कठिन है,…

अपने श्याम के गुन गाऊँ, गुन गाऊँ चरन चित लाऊँ, बहुरि न भव-जल आऊँ

Apne Shyam Ke Gun Gaun अपने श्याम के गुन गाऊँ।। टेक।। गुन गाऊँ चरन चित लाऊँ, बहुरि न भव-जल आऊँ।। 1।। चुन चुन कलियाँ मैं सेज बिछाऊँ, बगलन फूल भराऊँ।।…

भयो मैं बाजीगर को बँदरा

Bhayo Mai Bajigar Ko Bandara भयो मैं बाजीगर को बँदरा।। टेक।। भवसागर में भूलि परौ मैं, विषय बड़ो अगरा।। 1।। मैं नाचत प्रभु मोहिं नचावत, हुकुम धनी का जबरा। आशा…

वन से आवत धेनु चराये

Van Se Aavat Dhenu Charaye वन से आवत धेनु चराये।। टेक।। लीन्हें लाल ललित कर लकुटी, गौवन को गोहनाये।। 1।। उड़ि उड़ि गोधुर परत बदन पर, सुन्दर परम सुहाये। सुन्दर…

वंशी ध्वनि प्राण हरे, गोप बधू श्रवनन सुनि धाई, टोना सहज परे

वंशी ध्वनि प्राण हरे।। टेक।। गोप बधू श्रवनन सुनि धाई, टोना सहज परे।। 1।। बिसरी सुधि शरीर सजन पति, पिता पुत्र बिसरे। लोक-लाज, कुल-कान बिसरि गई, रही श्याम रट रे।।…

आऊँगी मैं दही लैके भोर, दीजै आज जान घर मोहन, नागर नन्दकिशोर

आऊँगी मैं दही लैके भोर।। टेक।। दीजै आज जान घर मोहन, नागर नन्दकिशोर।। 1।। हम तौ आज सखिन संग आई, जिन कीजै झकझोर। हौं उठि भोर सवारे अइहौं, प्रात समय…

हमारो दान दैबे, तुम खड़ी रहहु ब्रजनारी

Hamaro Dan Daibe Tum Khadi Rahahu Brajnari हमारो दान दैबे, तुम खड़ी रहहु ब्रजनारी।। टेक।। नित प्रति आनि दही तुम बेचौ, जा ब्रज-गाँव मझारी। को जाने कित जावो चली तुम,…

ऊधो! कौन बात को कीजै गारा, ना प्रभु जाति न पांति हमारी, न हरि हितु हमारा

ऊधो! कौन बात को कीजै गारा।। टेक।। ना प्रभु जाति न पांति हमारी, न हरि हितु हमारा।। 1।। हम अहीर वह यादव नन्दन, जानत जग-संसारा। दिन दश प्रीति करि स्वारथ…

Mukund Swami मुकुन्द स्वामी

श्री मुकुन्द स्वामी कुछ समय तक अपने समर्थ गुरु स्वामी प्राणनाथ के पास पन्ना (म.प्र.) में रहे। यहाँ रहते हुए Mukund Swami ने कई पदों की रचना की। इस प्रकार…