जुबना नोकदार प्यारी के, बने बैसबारी के। इनने रेजा इतने फारे, गोटा और जारी के। चपेरात चोली के भीतर, नीचे रंग सारी के। ईसुर कात बचन ना पावें, मसक लेव…
Category: बुन्देलखण्ड का सहित्य

How the folk literature and Hindi literature of Bundelkhand originated and developed and through which stages it reached here today.
गोदे गुदनारी ने गुदना, मिली हमारे जिदना
गोदे गुदनारी ने गुदना, मिली हमारे जिदना। जबरई बांह पकरकें मोरी, कर दए छिदना-छिदना। अंसुआ गिरे आग के ऊपर, भीज गए दोउ जुबना। देखी की दिखनौस बरै वा, घरी आई…
जिदना लौट हेरती नइयां, बुरऔ लगत है गुइयां
जिदना लौट हेरती नइयां, बुरऔ लगत है गुइयां। सूक जात मौं बात कड़त ना, मन हो जात मरैयां। दुविदा होत तौन के डारो, तुम ही जान करइयां। ईसुर पानी भरन…
जानै कौन बाज दिन खाई, मित्र न देत दिखाई
जानै कौन बाज दिन खाई, मित्र न देत दिखाई। दीनी छोड़ लाज परिजन की, कुल की शान गमाई। सास-ससुर छोड़े ससुरे में, चली मायके आई। बरै भाग कोऊ अपनो न…
चलतन परत पैजना छमके, पांवन गोरी धन के
चलतन परत पैजना छमके, पांवन गोरी धन के। सुनतन रोम-रोम उठ आवत, धीरज रहत न तनके। छूटे फिरत गैल-खोरन में, ये सुख्तार मदन के। करवे जोग भोग कुछ नाते, लुट…
कैसे मिटै लगी कौ घाओ, ई की दवा बताओ
कैसे मिटै लगी कौ घाओ, ई की दवा बताओ। दिन या रात चियारें परतीं, ज्वर ना खाए चाओ। गुनिया और नावते हारे, खेल-खेल के माओ। कात ईसुरी कैसे करिए, चलत…
करके प्रीत करे सौ जाने, कात की कोउ न माने
करके प्रीत करे सौ जाने, कात की कोउ न माने। दाबन लगे दूर से नकुआ, लासुन भरे बसाने। काने कछू-कछू कै आवै, ना रए बुद्धि ठिकाने। बिगरे कैउ आ दिन…
इनकी बोलन भौतउ साजी, सुने होत मन राजी
इनकी बोलन भौतउ साजी, सुने होत मन राजी । कड़ते बोल कोकिला कैसे, दवा कौन खां माजी। रोजउं-रोजउं हँसती रातीं, बोले से कओ आंजी। ईसुर कभऊं काउ पै ना भई,…
अबकी बेर बिछुरतन मरने, का जाने तोय करने
अबकी बेर बिछुरतन मरने, का जाने तोय करने। तुम सुख चाओ हमे दुख दैकें, तोरौ जनम बिगरने। मोरी कौन ख़बर राने जब, तोय खसम संग परने। दूर से लखें रजऊ…
अब ना लगै गाँव में नीको, मित्र बिछुर गओ जीकौ
अब ना लगै गाँव में नीको, मित्र बिछुर गओ जीकौ। आवौ-जावौ करे रातते, अब मौं देखों कीकौ। कर और बार पुरा पाले में, लगत मुहल्ला फीकौ। सौने कैसो पानी ईसुर,…
