लै गई प्रान पराये हरकें, मांग में सेन्दुर भरकें। एक टिबकिया नैचें दैकें, टिकली तरे उतरकें। तीके बीच सींक मिल बेंड़ी, कै गई भौंह पकरकें। ईसुर बूंदा दए रजऊ ने,…
Category: बुन्देलखण्ड का सहित्य

How the folk literature and Hindi literature of Bundelkhand originated and developed and through which stages it reached here today.
यारी सदा निवाए रइयो, बीच बिसर न जइयो
यारी सदा निवाए रइयो, बीच बिसर न जइयो। जैसो दिन है हाल दिनन में, ऐसेऊं राखीं रइयो। सुनके बात जिया मोरे की, अपने जिउकी कईयो। अबै कछू ना बिगरो ईसुर,…
मोरी रजऊ सासरे जातीं, हमें लगा लो छातीं
मोरी रजऊ सासरे जातीं, हमें लगा लो छातीं। कै नई सकत गरौ भर देतीं, अंसुवन अखियां बातीं। ऊसेई चित्र लिखि सी रैगईं, मां से कछु न कातीं। हमने करी हमई…
मोरी कही मान गैलारे, दिन डूबें ना जा रे
मोरी कही मान गैलारे, दिन डूबें ना जा रे। आगूं गांव दूर लौ नइयां, नैया चैकी पारे। देवर हमरे कछू ना जाने, जेठ जनम के न्यारे। पानी पियो पलंग लटका…
बांकी रजऊ तुमारी आंखें, रओ घूंघट में ढाकें
बांकी रजऊ तुमारी आंखें, रओ घूंघट में ढाकें। हमने अबै दूर सैं देखी, कमल फूल सी पाखें। जिनखां चोट लगत नयनन की, डरे हजारन कांखें। जैसी राखें रई ईसुरी, ऊसई…
बस्ती बसत लोग बहुतेरे, कौन काम के मेरे
बस्ती बसत लोग बहुतेरे, कौन काम के मेरे। बैठे रात हजारन कोदी, कबहुं न जे दृग हेरे। गैल चलत गैलारे चरचे, सब दिन सांझ सबेरे। हाथ दई उन दो आँखन…
बनवा लेव पुंगरिया तड़के, आज पिया से अड़के
बनवा लेव पुंगरिया तड़के, आज पिया से अड़के। ऐसी सखियां कोउ न पैरें, गांव भरे से कड़के। हीरा-मोती खूब जड़े हों, भई मोल में बढ़के। कहें ईसुरी प्यारी लाने, धुरी…
तुमने मोह टोर दओ सैंयां, खबर हमारी नैंयां
तुमने मोह टोर दओ सैंयां, खबर हमारी नैंयां। कोचन में हो निबकन लागीं, चुरियन छोड़ी बइयां। सूकी देह छिपुरिया हो गई, हो गए प्रान चलैयां। जे पापिन ना सूखी अंखियां,…
तुम खां रटत रात भर रौवो, और बिछुर गए सोवो
तुम खां रटत रात भर रौवो, और बिछुर गए सोवो। भींजत रात बिछौना अंसुवन, सब दिन करत निचोवो। कांलों कहे तुमें समझावे, नाहक बचपन खोवो। ईसुर बैठ रहे घर अपने,…
जुबना बीते जात लली के, पर गए हात छली के
जुबना बीते जात लली के, पर गए हात छली के। मस्कत रात पुरा पाले में,सरकत जात गली के। कसे रात चोली के भीतर, जैसे फूल कली के। कात ईसुरी मसकें…
