सबसे बोलें मीठी बानी, थोड़ी है ज़िदगानी

सबसे बोलें मीठी बानी, थोड़ी है ज़िदगानी। येई बानी हाथी चढ़बावै, येई उतारै पानी। येई बानी सुरलोक पठावै, येई नरक निशानी। येई बानी सें तरैं ईसुरी, बडे़-बडे़ मुनि ज्ञानी। जग…

लैलो सीताराम हमारी, चलती बेरा प्यारीं

महाकवि ईसुरी कर्म योगी थे अपना कर्म उन्हे पता था । अन्तिम समय तक वे अपने रचना कर्म में लगे रहे। लैलो सीताराम हमारी, चलती बेरा प्यारीं। ऐसी निगा राखियो…

यारो इतनो जस कर लीजौ, चिता अन्त न कीजौ

साहित्यिक समृद्धि से परिपूर्ण ईसुरी का सारा जीवन साहित्यिक उधेड़ बुन में लगा रहा। वे सच्चाई पर चलने वाले, ईमान का पालन करने वाले निश्छल, निष्कपट, खुले मन विचारों वाले…

मोरी सब खां राधावर की, भई तैयारी घर की

कदाचित यह उनकी अन्तिम रचना है, जिसके अन्तिम शब्दों के साथ उनके बोल थक गए थे। मोरी सब खां राधावर की, भई तैयारी घर की। रातै आज भीड़ भई भारी,…

मानुस कबै-कबै फिर होने, रजऊ बोल लो नौनें

मानुस कबै-कबै फिर होने, रजऊ बोल लो नौनें। चलती बैरां प्रान छोड़ दए, की के संगे कौनें। जियत-जियत को सबकोउ, सबको मरे घरी भर रौनें । होजें और जनम खां…

बाहर रेजा पैर कड़े गए, नैचैं मूंड़ करैं गए

महाकवि ईसुरी अपनी द्विअर्थी फागों के माध्यम से नायिका की आड़ लेकर इस संसार को उपदेशित करते हुए कहते हैं। बाहर रेजा पैर कड़े गए, नैचैं मूंड़ करैं गए। जीसे…

बखरी रैयत है भारे की, र्दइ पिया प्यारे की

बखरी रैयत है भारे की, र्दइ पिया प्यारे की। कच्ची भीत उठी माटी की, छबी फूस चारे की। बे बन्देज बड़ी बेबाड़ा जेई, में दस द्वारे की। बिना किबार-किबरियां वालीं,बिना…

तोरो मन पापी तन नौनों, एक भांत में दोनों

तोरो मन पापी तन नौनों, एक भांत में दोनों। मन से रात अन्देश सबई कोउ, तन को मचो दिखोनों मत माटी की मोल कदर कर,तन की कीमत सोनों। ईसुर एक…

तन तन दोऊ जने गम खावें करो फैसला चायें

तन तन दोऊ जने गम खावें करो फैसला चायें। नायं बगोरा को मेडो है बड़े गांव को मायें। माझ पारिया पै झगड़ा है तूदा फिरत बनायें। कानूनगो जू कान सें…

करके नेह टोर जिन दईयो, दिन-दिन और बढ़इयो

करके नेह टोर जिन दईयो, दिन-दिन और बढ़इयो। जैसे मिले दूध में पानी, उसई मनै मिलइयो। हमरो और तुम्हारो जो जिउ एकई जाने रइयो। कात ईसुरी बांह गहे की, खबर…