बुन्देलखण्ड का ढिमरयाई जातिगत नृत्य है। इस विधा को ढ़ीमर जाती के लोग करते हैं। इसलिए इसका नाम ढ़िमरयाई हुआ। Bundeli Dhimaryai बुंदेलखंड में निवासरत ढीमर जाती का काम पानी…
Category: बुन्देलखण्ड की लोक संस्कृति

How did the folk culture of Bundelkhand emerge and develop, in which stages and in what form it has come today, what is its status.
मुंशी प्रेमचंद के हरदौल
लोक देवताओं के विषय में लेखकों और साहित्यकारों अपने तरीके से दर्शाया है Munshi Premchand ke Hardaul मुंशी प्रेमचंद के हरदौल का अपना नजरिया है । बुन्देलखण्ड के लोक देवताओं…
लाला हरदौल- बुन्देलखण्ड के लोक देवता
बुन्देलखण्ड की लोकसंस्कृति, लोकआस्था और परम्पराओं में लाला हरदौल का विशिष्ट स्थान है। वे यहाँ के सर्वाधिक पूज्य लोकदेवताओं में से एक हैं। जनमानस में लाला हरदौल वीरता, त्याग, पवित्रता,…
बुन्देलखण्ड के लोकनृत्य
बुन्देलखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति में लोकनृत्यों का विशिष्ट स्थान है। यहाँ के लोकनृत्य जनजीवन की सहज अभिव्यक्ति, सामूहिक उल्लास, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परम्पराओं के सशक्त माध्यम हैं। बुन्देली लोकनृत्यों…
Bundelkhand Ki Fag Gayki बुन्देलखण्ड की फाग गायकी
बुन्देलखण्ड की फाग गायकी एक लोककाव्य है, लोककाव्य का अपना काव्यशास्त्र होता है। अपनी भाषा, शब्द और छंदयोजना से लेकर भाव-विस्तार तक उसका अपना विधान होता है। उसमें एक लटकनिया…
Bundeli Balkon ke Abhushan बुन्देली बालकों के आभूषण
बुंदेलखंड की परंपरा के अनुसार जिस प्रकार स्त्रियों एवं पुरुषों के आभूषण होते हैं। उसी प्रकार बच्चों के आभूषण होते हैं। Bundeli Balkon ke Abhushan का अपना सौंदर्य होता है।…
