बिलवारी – बुन्देली लोकगीत

खेतों में किसान की बोनी के समय बिलवारी Bilavari गायी जाती है। इसे पुरुष ही गाते हैं- एकल या युगल। इस अवसर पर खेत में दाना बोने के समय श्रम…

चैती या दिनरी- बुन्देली लोक गीत

गेहूँ या चने की फसल काटते समय चैती या दिनरी Chaiti Ya Dinari गायी जाती है। यह स्त्रियों का समूह गीत है। इस गीत का गायन भी विलंबित लय से…

खड़ी फाग- बुन्देली लोक गायन

बुन्देलखण्ड की खड़ी फाग का उद्भव चौकड़िया फाग से ही हुआ है । चैकड़िया फाग के प्रत्येक चरण में परार्द्ध में दो मात्राएँ और बढ़ा देने से 30 मात्रा की…

नैना बंध लागे कहियो हो- बुन्देली लोक गीत

बुन्देलखण्ड  में विभिन्न लोकनृत्यों प्रचलन है जिनमें विभिन्न प्रकार के गीतों का गायन होता है। बुंदेलखंड में लोकप्रिय मुख्य लोकनृत्य निम्न प्रकार है:- बधाई नृत्य, राई नृत्य, बरेदी नृत्य, सैरा…

बुन्देलखण्ड का लोक संगीत

बुन्देलखण्ड का लोक संगीत Bundelkhand Ka Lok Sangeet बहुत समृद्ध और प्राचीन है, जो वहाँ की संस्कृति, वीरता और जनजीवन को दर्शाता है। लोक गीत वैसे तो मानव समाज के…

बुन्देली लोक गीतों की विधाएं

बुन्देलखण्ड की लोकसंस्कृति में लोकगीतों का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। बुन्देली लोकगीत यहाँ के जनजीवन, सामाजिक परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं, रीति-रिवाजों, प्रेम-भावनाओं और प्रकृति के साथ मनुष्य के संबंधों की सजीव…

पन्ना लाल असर के लोकगीत

‘लोकभूषण’ पन्ना लाल असर का दिल बुन्देलखण्ड की लोक संस्कृति, साहित्य और बुन्देली विरासत को सहेजने के लिए  धड़कता है। ‘लोकभूषण’ पन्ना लाल असर का जीवन परिचय     अकेली…

परशुराम अवस्थी के लोकगीत

बुन्देलखण्ड की लोक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले परशुराम अवस्थी के लोकगीत गाँव की चौपाल के लोकगीत हैं , आम जनमानस के लोक गीत हैं । इनके गाने का अंदाज अलमस्त…

उर्मिला पाण्डे के लोकगीत

बुन्देलखण्ड स्वर कोकिला उर्मिला पाण्डे का जीवन परिचय   मैया नैन बान दुर्गे मार रही हो माँ ( नवरात्रि भजन ) अल गरजें भरे बेलाताल, गागर मोरी न डूबे राम…

Bajir Ki Gariyon Me Lokranjan बजीर की गारियों में लोकरंजन

बजीर मूलतः बुंदेली के कवि थे। जन-जीवन और बुंदेलखंड के परिवेश को और संस्कारों को उन्होंने बहुत नजदीक से देखा था, अनुभव किया था वह सब उनकी कविता में स्पष्ट…