Varsha Ritu Ke Geet  वर्षा ऋतु के गीत

बुन्देलखंड में लोक संस्कृति में प्रकृति का सानिध्य हमेशा से रहा है। प्रकृति जीवन का पर्याय है। प्रकृति और ऋतु-परिवर्तन एक दूसरे की पूरक हैं। जेठ मास की गर्मी से…

Lok Jivan ke Swar बुन्देली लोक जीवन के स्वर

भइया जिन मारौ मोये काँकरी, जिन बोलो भाभी बोली हमतौ चिरैया परदेश की, भाभी आज उडै कै काल।। घर के आंगन में फुदकने वाली चिड़ियाँ हैं वालिकायें। Lok Jivan ke…

Bundelkhand Ke Ritu Geet बुन्देलखंड के ऋतु गीत

बुन्देलखंड के लोक-जीवन का उल्लास-झरनों के स्वभाव वाला है, जो यथार्थ की चट्टानों से टकराता है, आवेश के अवसरों पर उफान में बदल जाता है और सहज होकर कल-कल करता…

Sair Aur Launi Fadkavya सैर और लाउनी फड़काव्य

बुन्देलखंड  की Sair Aur Launi Fadkavya  लोकगायकी के होते हुए भी उनका गायन फड़ों पर ही होता रहा है ।  बुन्देलखंड की लोक गायकी को समृद्ध करने में फाग गायकी…

Lavni aur Khyal Sahitya  लावनी और ख्याल साहित्य

बुन्देलखंड का Lavni aur Khyal Sahitya में माता-पुत्र का  सम्बन्ध है। ‘ख्याल’ लोकभाषा का परम्परागत शब्द है। बुन्देलखंड में राई गीत की तरह ख्याल भी लोकगीत की एक शैली है,…

Bundelkhand Ki Alha Gayki बुन्देलखण्ड की आल्हा गायकी

बुन्देलखंड की आल्हा गायकी मे वाचिक,आंगिक अभिनय को काफी समय मिल जाता है और गायक स्वर या ढोल की भंगिमाओं तथा नेत्र एवं हस्त-संचालन से युक्त मुख मुद्राओं द्वारा एक…

Bundeli Lokgeeto ki Visheshta बुन्देली लोकगीतों की विशेषता

बुन्देलखण्ड की सांस्कृतिक पहचान यहाँ के लोक गीतों नृत्यों एवं परम्पराओं में दृष्टिगोचर होती है। बुन्देलखण्ड के पर्व – त्योहारों एवं परंपराओं मे गाए जाने वाले लोकगीत ही bundeli Lokgeeto…

लमटेरा – बुन्देलखण्ड का भजन शैली में यात्रा गीत

Bundelkhand Ki Fag Gayki बुन्देलखण्ड की फाग गायकी

बुन्देलखण्ड की फाग गायकी एक लोककाव्य है, लोककाव्य का अपना काव्यशास्त्र होता है। अपनी भाषा, शब्द और छंदयोजना से लेकर भाव-विस्तार तक उसका अपना विधान होता है। उसमें एक लटकनिया…

Bundeli Lokgeet Parampara बुन्देली लोकगीत परम्परा

बुन्देलखंड के लोकजीवन मे उद्भावित तरह- तरह के भावों से उत्पन्न रसानुभूति रचनाओं को जन्म देती  हैं। वही लोकसाहित्य की रचना होती रही है। लोक के धर्म में लोकादर्श, लोकनीति…