करके नेह टोर जिन दईयो, दिन-दिन और बढ़इयो। जैसे मिले दूध में पानी, उसई मनै मिलइयो। हमरो और तुम्हारो जो जिउ एकई जाने रइयो। कात ईसुरी बांह गहे की, खबर…
Category: बुन्देलखण्ड का सहित्य

How the folk literature and Hindi literature of Bundelkhand originated and developed and through which stages it reached here today.
ऐंगर बैठ लेव कछु काने, काम जनम भर राने
ऐंगर बैठ लेव कछु काने, काम जनम भर राने। बिना काम को कोऊ नइयां, कामें सब खां जाने। जौन काम खां करने नैंयां, कईयक होत बहाने। जौ जंजाल जगत कौ…
आओ को अमरौती खाकें, ई दुनियां में आकें
आओ को अमरौती खाकें, ई दुनियां में आकें। नंगे गैल पकर गए धर गए, का करतूत कमाकें। जर गए बर गए धुन्धक लकरिया, धर गए लोग जराके। बार-बार नई जनमत…
अब दिन गौने के लग आये, हमने कईती काए
अब दिन गौने के लग आये, हमने कईती काए। सुसते नई काम के मारें, ऐंगर बैठ न पाए। आसों साल वियाब भये ते, परकी साल चलाए। तेवरस साल विदा की…
रस्ता आधी रात लौ हेरी, छैल बेदरदी तेरी।
रस्ता आधी रात लौ हेरी, छैल बेदरदी तेरी। तलफत रही पपीहा जैसी, कहां लगाई देरी। भीतर से बाहर हो आई, दै-दै आई फेरी। उठ-उठ भगी सेज सूनी से, आंख लगी…
हम पै बैरिन बरसा आई, हमें बचा लेव भाई
हम पै बैरिन बरसा आई, हमें बचा लेव भाई। चढ़कें अटा घटा न देखें, पटा देव अगनाई। बरादरी दौरियन में हो, पवन न जावे पाई। जै दु्रम कटा छटा फुलबगिया,…
हमसें काये छरकतीं राती, औरन खां पतयातीं
हमसें काये छरकतीं राती, औरन खां पतयातीं। औरैं आंय तनक दै-दै के, दौर-दौर के जातीं । हमतौ कहैं प्रेम की बाते, अपुन जहर सौ खातीं। जो मिल जायें गली खोरन…
हम पे नाहक रंग न डारौ, घरै न प्रीतम प्यारौ
हम पे नाहक रंग न डारौ, घरै न प्रीतम प्यारौ। फीकी फाग लगत बालम बिन, मन में तुमई बिचारौ। अतर गुलाब अबीर ना छिरकौ,पिचकारी ना मारौ । ईसुर प्रान पति…
सैंया बिसा सौत के लाने, अंगिया ल्याये उमाने
सैंया बिसा सौत के लाने, अंगिया ल्याये उमाने। ऐसे और बनक के रेजा, अब ई हाट बिकाने। उनने करी दूसरी दुल्हिन, जौ जी कैसे माने। उए पैर दौरे से कड़ने,…
सूजै इन आँखन अनवेली, जग में रजऊ अकेली
सूजै इन आँखन अनवेली, जग में रजऊ अकेली। भरके मूठ गुलाल धन्य वे, जिनके ऊपर मेली। भाग्यवान जिन में पिचकारी, रजऊ के ऊपर ठेली। ई मइना की आउन हम पै,…
