कदाचित यह उनकी अन्तिम रचना है, जिसके अन्तिम शब्दों के साथ उनके बोल थक गए थे। मोरी सब खां राधावर की, भई तैयारी घर की। रातै आज भीड़ भई भारी,…
Category: बुन्देलखण्ड का सहित्य

How the folk literature and Hindi literature of Bundelkhand originated and developed and through which stages it reached here today.
मानुस कबै-कबै फिर होने, रजऊ बोल लो नौनें
मानुस कबै-कबै फिर होने, रजऊ बोल लो नौनें। चलती बैरां प्रान छोड़ दए, की के संगे कौनें। जियत-जियत को सबकोउ, सबको मरे घरी भर रौनें । होजें और जनम खां…
बाहर रेजा पैर कड़े गए, नैचैं मूंड़ करैं गए
महाकवि ईसुरी अपनी द्विअर्थी फागों के माध्यम से नायिका की आड़ लेकर इस संसार को उपदेशित करते हुए कहते हैं। बाहर रेजा पैर कड़े गए, नैचैं मूंड़ करैं गए। जीसे…
बखरी रैयत है भारे की, र्दइ पिया प्यारे की
बखरी रैयत है भारे की, र्दइ पिया प्यारे की। कच्ची भीत उठी माटी की, छबी फूस चारे की। बे बन्देज बड़ी बेबाड़ा जेई, में दस द्वारे की। बिना किबार-किबरियां वालीं,बिना…
तोरो मन पापी तन नौनों, एक भांत में दोनों
तोरो मन पापी तन नौनों, एक भांत में दोनों। मन से रात अन्देश सबई कोउ, तन को मचो दिखोनों मत माटी की मोल कदर कर,तन की कीमत सोनों। ईसुर एक…
तन तन दोऊ जने गम खावें करो फैसला चायें
तन तन दोऊ जने गम खावें करो फैसला चायें। नायं बगोरा को मेडो है बड़े गांव को मायें। माझ पारिया पै झगड़ा है तूदा फिरत बनायें। कानूनगो जू कान सें…
ईसुरी की साहित्यिक और आध्यात्मिक नायिका “रजऊ”
महाकवि ईसुरी के फाग साहित्य में Isuri Ki Nayika Rajau को सर्वमान्य स्वीकारोक्ति प्राप्त है। रजऊ कौन है? ईसुरी से उनका ताल्लुकात क्या रहा है? इसके सम्बंध में साहित्यकार एकमत…
द्विज धीरे खां ईसुर, पौंचाई परनाम
धीरे पंडा और ईसुरी के बीच घनिष्ठ मित्रता थी । धीरे पंडा कवि नहीं थे वह एक सुप्रसिद्ध गायक आवश्यक है स्वयं ईसुरी ने उनकी प्रशंसा में कुछ फागें लिखी…
ढपला रमतूला तुरइ, अलगोजा की टेक
कुण्डलियाँ ढपला रमतूला तुरइ, अलगोजा की टेक। मिलके बजै कसावरी, सब बाजन में एक।। सब बाजन में एक पालकी पीनस आवै । गांव के नायकन कीनों सुख सम्बन्द ।। थोरौ…
स्वामी से सेवक सकुच, विनय करत करजोर
कुण्डलियाँ स्वामी से सेवक सकुच, विनय करत करजोर। मरजी माफक फर्द की, लगै सौ अरजी मोर। लगै सौ अरजी मोर, सुतर आगे को धावें। नाय माय की खबर, खुशी खातिर…
