बुन्देलखण्ड की एक लोक-गाथा परम्परा है। Karasdev Ko sako मे कारसदेव की वीरता और गौ रक्षा के विषय में गुणगान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। बुन्देलखण्ड के हर…
Category: बुन्देलखण्ड का सहित्य

How the folk literature and Hindi literature of Bundelkhand originated and developed and through which stages it reached here today.
Lakhansingh Ko Rachhro लाखनसिंह कौ राछरौ
कन्नौज के राजा लाखन सिंह के राज में दुश्मनों ने अचानक आक्रमण कर दिया ऐसी स्थिति में नव विवाहिता सुंदर पत्नी को छोड़कर युद्ध भूमि मे जाना पडा। Lakhansingh Ko…
Raja Hindupati Ko Rachhro राजा हिन्दूपति कौ राछरौ
बुन्देलखण्ड के राजाओं में लोहागढ़ के राजा हिन्दूपति का महत्त्वपूर्ण स्थान है। Raja Hindupati Ko Rachhro मे साहस और जिंदादिली का बखान है। उन्होंने वीरता पूर्वक अंग्रेजों की विशाल सेना…
Raja Dhansingh Ko Rachhro राजा धनसिंह कौ राछरौ
यह बुन्देलखंड की प्रमुख लोकगाथा है। Raja Dhansingh Ko Rachhro मे बुंदेली संस्कृति केअनुसार शकुन-अपशकुन को प्रमुख स्थान दिया जाता है। ये सारा अनुभव और भुक्त भोगी लोगों का ज्ञान…
Raja Parichhat ko Rachhro राजा पारीछत कौ राछरौ
सन् 1840 ई. में जैतपुर नरेश पारीछत ने सर्वप्रथम अंग्रेजों के विरूद्ध क्रांति का शंखनाद किया था। Raja Parichhat ko Rachhro मे बुंदेलखंड के सर्वप्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरूआत का…
Rani Laxmibai Ko Rachhro रानी लक्ष्मीबाई कौ राछरौ
लक्ष्मीबाई कौ राछरौ ‘कविवर’ मदनेश जी की बुंदेली भाषा की एक अमूल्य धरोहर है। इसमें ओज और शौर्य का उत्कृष्ट स्वरूप दिखाई देता है। Rani Laxmibai Ko Rachhro में टीकमगढ़…
Mathurawali ko Rachhro मथुरावली कौ राछरौ
बुन्देलखंड में कुछ ऐसी वीर बालाएँ अतरित हुई हैं, Mathurawali ko Rachhro की नायिका ने अपनी आन-बान-शान, मान-मर्यादा, अपने पातिव्रत धर्म और सतीत्व की रक्षा हेतु प्राण अर्पण कर दिये…
Dhola-Maru Ko Rachhro ढोला-मारू कौ राछरौ
Dhola-Maru Ko Rachhro मे ढोला और मारू की बचपन मे शादी हो जाती है। जब दोनो बडे होते हैं तो मरू अनेक संदेश ढोला को भेजती है। जब ढोला अपनी…
Kalyan Singh Ko Rachhro कल्याण सिंह कौ राछरौ
Kalyan Singh Ko Rachhro में कल्याण सिंह के मन में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के प्रति अटूट श्रद्धा थी, इस लिये स्वतंत्रता संग्राम में महारानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया था। बुन्देलखण्ड…
Kajariyan ko Rachhro कजरियँन कौ राछरौ
कजलियाँ बुन्देलखण्ड का सांस्कृतिक पर्व है। Kajariyan ko Rachhro मे महोबा नरेश परमाल की राजकुमारी ‘चंद्रावली’ के कजलियों के उत्सव का वर्णन है। यह पारस्परिक प्रेम और अनुराग का प्रतीक…
