बुंदेलखण्ड में कुछ ऐसे भी राछरे प्रचलित हैं, जो प्रेम-प्रधान हैं। उनकी दिशा पति-पत्नी के प्रेम और श्रंगार की ओर है। Urag Kau Rachhro एक आदर्श और मार्ग-दर्शक उदाहरण है…
Category: बुन्देलखण्ड का सहित्य

How the folk literature and Hindi literature of Bundelkhand originated and developed and through which stages it reached here today.
Aman Singh Ko Rachhro अमान सिंह कौ राछरौ
Aman Singh Ko Rachhro में पन्ना के राजा अमान सिंह और अकोड़ी के जागीरदार श्री जुझार सिंह के द्वन्द युद्ध का वर्णन है। भोजन करते समय किसी साधारण सी बात …
Sant-Basant संत-बसंत लोकगाथा परिचय
बुन्देलखण्ड की कुछ गाथाओं में पातिव्रत, प्रेम, भ्रातृप्रेम और लोक संस्कृति का अटूट भण्डार दिखाई देता है। भ्रातृप्रेम के क्षेत्र में Sant-Basant नाम की लोक गाथा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। बुन्देलखण्ड…
Surhin Gatha सुरहिन गाथा-लोकगाथा परिचय
बुन्देलखण्ड मे Surhin Gatha सुरहिन गाथा प्रायः नवरात्रि के अवसर पर गाई जाती है। गाथा के बीच-बीच में हर-पंक्ति में माँ को संबोधित किया जाता है। बुंदेली लोक-वाद्यों के साथ इस…
Sake ke Prakar साके के प्रकार
बुंदेलखण्ड के ‘साकों’ की रचना का मूल आधार तो प्रशंसा ही है, किसी भी व्यक्ति विशेष के बारे में बढ़ा चढ़ा कर लिखना, उस व्यक्ति का गुणगान करना, उस व्यक्ति…
Bundeli sake ki Visheshta बुन्देली साके की विशेषता
बुन्देलखंड की लोक-गाथाओं का ‘साके’ एक प्रमुख प्रकार हैं। साकेकारों ने अपने आश्रयदाताओं की प्रशंसा तो खूब बढ़ा-चढ़ाकर की है। Bundeli sake ki Visheshta है कि, किसी भी कायर राजा…
Bundelkhand Ke Sake बुन्देलखंड के साके
बुन्देलखंड की लोकगाथाओं में Bundelkhand Ke Sake एक महत्त्वपूर्ण प्रकार हैं। बुन्देलखंड की कुछ लोकगाथाएँ साकौ के नाम से प्रचलित हैं। उनमें प्रायः वीर पुरुषों, समाज कल्याण करने वाले धार्मिक और…
Parmal Raso परमाल रासो-बुन्देलखंड की शौर्यगाथा
बुन्देलखंड की शौर्य गाथा का यह Parmal Raso ग्रंथ ‘आल्हा’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया है। सम्पूर्ण ग्रंथ आल्हा-उदल की वीरता पर केन्द्रित है। आल्हा महान योद्धा दल के…
Parsa Lok Gatha परसा-लोक गाथा परिचय
बुन्देलखंड की Parsa Lok Gatha मे जादू-टोने का अजीब ताना-बाना बुना गया है। परसा की गोपीचन्दा को ब्याहने की इच्छा थी। गोपीचन्दा ने तालाब में जादू की तुमरिया छोड़कर चुनौती…
Gahnai Lok Gatha गहनई -लोक गाथा परिचय
बुन्देलखंड की Gahnai Lok-gatha कुछ क्षेत्रों में गोचारण के लिए जाते समय या गोचारण के बाद लौटते समय अहीरों द्वारा गाया जाता है। अहीरों के समूह अपने-अपने खिरकों से गायें…
