अब ना लगै गाँव में नीको, मित्र बिछुर गओ जीकौ। आवौ-जावौ करे रातते, अब मौं देखों कीकौ। कर और बार पुरा पाले में, लगत मुहल्ला फीकौ। सौने कैसो पानी ईसुर,…
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Isuri Ki Chaukadiya ईसुरी की चौकड़ियां
Bundelkhand की बुन्देली भाषा के विख्यात महाकवि ईसुरी ने फाग विधा मे चौकड़िया फाग की रचना कर बुन्देली साहित्य को एक नई दिशा दी। Isuri Ki Chaukadiya मे जीवन दर्शन…
Isuri Ki Chaukadiya Fag ईसुरी की चौकड़ियां फाग
Bundelkhand की बुन्देली भाषा के विख्यात महाकवि ईसुरी ने फाग विधा मे चौकड़िया फाग की रचना कर बुन्देली साहित्य को एक नई दिशा दी। Isuri Ki Chaukadiya Fag मे जीवन…
Isuri Ke Ram ईसुरी के राम
मथुरा बृंदावन से वापस आकर महाकवि ईसुरी एक वर्ष तक चित्रकूट में रहे और वहाँ अनेक सतसंगों के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीलाओं को सुना गुना और फिर…
