सेंगोल राजदंड – भारतीय संस्कृति का प्रतीक

भारत जम्बूद्वीप, भारतखण्ड, हिमवर्ष, अजनाभवर्ष, भारतवर्ष, आर्यावर्त, हिन्द, हिन्दुस्तान एक विशाल देश आदिकाल से रहा है।  जिसमें भिन्न-भिन्न मान्यताओं एवं प्रथाओं से जुड़े हुए लोग रहते आए हैं। जब कभी…

संजा – मालवा का लोकपर्व

संजा Sanja लोकपर्व मालवांचल में श्राद्ध पक्ष में (प्रत्येक वर्ष भादव माह की पूर्णिमा से अश्विन माह की अमावस्या तक) मनाया जाता है, यह पर्व कुवॉरी कन्याओं द्वारा बड़ी आस्था…

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में

Shri Ram Janki Baithe Hain Mere Sine Man श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में, देख लो मेरे मन के नागिनें…

बुन्देलखण्ड के चन्देल कालीन मंदिर

बुन्देलखण्ड का प्रमुख स्थल मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित खुजराहो नामक स्थान है। Bundelkhand Ke Chandel Kalin Mandir नवीं शताब्दी से लेकर बारहवीं शताब्दी तक अनेक सुन्दर तथा भव्य…

राजपूत कालीन चित्रकला

Rajput Period painting चित्रकला का सम्बन्ध मानव के भावनात्मक दैनिक जीवन से है। मनुष्य ने विभिन्न प्रकार के सुन्दर चित्र बनाकर अपनी भावनाओं और हर्ष को व्यक्त किया है। गुप्तकाल…

राजपूत कालीन साहित्य कला

Rajput Period Literature Art राजपूत राजाओं का शासनकाल साहित्य की उन्नति के लिए विख्यात है। राजपूत कालीन साहित्य कला का विशेष योगदान नरेशों का रहा । कुछ राजपूत नरेश स्वयं…

राजपूत कालीन धार्मिक जीवन

राजपूत कालीन धार्मिक जीवन में हिन्दू तथा जैन धर्म देश में अत्यन्त लोकप्रिय थे। बौद्ध धर्म का अपेक्षाकृत कम प्रचलन था और वह अपने पतन की अन्तिम अवस्था में पहुँच…

राजपूत कालीन आर्थिक स्थिति

राजपूत कालीन आर्थिक स्थिति कृषि पर आधारित थी । इस काल में कृषि जनता की जीविका का प्रमुख साधन थी। इस समय तक कृषि का पूर्ण विकास हो चुका था।…

राजपूत कालीन सामाजिक जीवन

राजपूत कालीन सामाजिक जीवन में समाज वर्णों एवं जातियों के जटिल नियमों से बंधा हुआ था। उस समय जाति-प्रथा की कठोरता थी और समाज में सहिष्णुता की भावना का अभाव…

राजपूत कालीन संस्कृति

राजपूत कालीन संस्कृति भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है जिसने भारतीय धर्म एवं संस्कृति को एक नई दिशा प्रदान की है। इसने प्राचीनकाल से चली आ रही संस्कृति की…