चोल कालीन शासन व्यवस्था

चोल कालीन शासन व्यवस्था में एक सुविस्तृत अधिकारी तंत्र था जिसमें विभिन्न दर्जे के पदाधिकारी होते थे। केन्द्रीय अधिकारियों की कई श्रेणियां होती थी। सबसे ऊपर की श्रेणी को ‘पेरून्दनम’…

चोल कालीन संस्कृति मे साहित्य और कला

चोल कालीन संस्कृति मे साहित्य और कला के विकास में तमिल लेखकों में सर्वाधिक प्रसिद्ध जयन्गोन्दार था। वह कुलोत्तुंग प्रथम का राजकवि था और उसने ‘कलिंगत्तुपणि’ नामक ग्रंथ की रचना…

चोल कालीन संस्कृति मे धार्मिक दशा

चोल राजाओं के समय में तमिल प्रदेश में चोल कालीन संस्कृति मे धार्मिक दशा के अंतर्गत शैव तथा वैष्णव धर्मों का बोलबाला रहा। शैव नायनारों तथा वैष्णव आचार्यों ने इन धर्मों…

चोल कालीन संस्कृति

दक्षिण भारत के राज्यों में नवीं शताब्दी से तेरहवीं शताब्दी तक चोल कालीन संस्कृति का विशेष महत्व रहा है। चोल राज्य का प्रधान केन्द्र वर्तमान तंजाऊर और तिरूच्चिनापल्ली के जिले थे…

पल्लव कालीन कला और स्थापत्य

पल्लव नरेशों का शासनकाल कला एवं स्थापत्य की उन्नति के लिए प्रसिद्ध है। पल्लव कालीन कला और स्थापत्य दक्षिण भारतीय कला के इतिहास में सर्वाधिक गौरवशाली अध्याय है। पल्लव वास्तु कला…

पल्लव कालीन संस्कृति-धार्मिक दशा

हिन्दू धर्म में मोक्ष अथवा ईश्वर प्राप्ति के तीन साधन बताये गये हैं-कर्म, ज्ञान तथा भक्ति। वेद कर्मकाण्डी हैं। उपनिषदों में ज्ञान की प्रतिपादन है तथा गीता में इन तीनों…

पल्लव कालीन संस्कृति

चौथीं शताब्दी से नवीं शताब्दी के लगभग छः सौ वर्षों तक पल्लवों का प्रशासन दक्षिण भाग में रहा। इस दीर्घकालीन प्रशासन में पल्लव कालीन संस्कृति राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों…

गुप्तकालीन संस्कृति मे धार्मिक दशा

धार्मिक सहिष्णुता, समन्वय एवं विविध धार्मिक सम्प्रदायों के विकास की उत्तम  पृष्ठभूमि गुप्तकाल की धार्मिक विशेषता है। शुंग-सातवाहन काल में जिस वैदिक धर्म का पुनरूत्थान हुआ था, वह गुप्तकाल में…

गुप्त कालीन संस्कृति

भारतीय संस्कृति की प्रतिष्ठा और उन्नति को गौरवशाली पृष्ठभूमि गुप्तकाल के सांस्कृतिक उत्थान ने प्रदान की। गुप्त शासकों ने लगभग 275 ई से 550 ई तक शासन किया और गुप्त…

कुषाण कालीन संस्कृति

 Kushan Period Culture कुषाण कालीन संस्कृति के स्थापक पश्चिमी चीन के गोबी प्रदेश के मूल निवासी थे। इतिहासकार कुषाणों को ’यू- ची’ जाति का मानते है। कुषाणों को उनके मूल…