यह लोकगाथा बुन्देलखंड की चरागाही संस्कृति पर आधारित होती हुई भी दाम्पत्य-परक समस्या को केन्द्र में रखकर चलती है। चिड़िया Dharmasanvari और चिड़वा दंग रिछरिया का विवाद बच्चों के बँटवारे…
Category: बुन्देलखण्ड का सहित्य

How the folk literature and Hindi literature of Bundelkhand originated and developed and through which stages it reached here today.
Bundeli Virodhabhashi Shabd बुन्देली विरोधाभाषी शब्द
बुन्देलखंड की बुंदेली भाषा की वह मिठास, संस्कृतिक शब्दों का सयोंजन एवं सरस्ता के साथ-साथ शब्दों का सौंदर्य जो जनमानस के व्यवहार मे झलकता है। उन्ही शब्दों मे कुछ महत्त्वपूर्ण…
Bundeli Shabdkosh बुंदेली शब्दकोश
बुन्देली शब्दकोश Bundeli Shabdkosh एक ऐसा शब्द-संग्रह है जिसमें बुन्देली भाषा के शब्दों, उनके अर्थ, उच्चारण और प्रयोग को संग्रहित किया गया होता है। बुन्देली भाषा मध्य भारत की एक…
बुन्देली का काव्य साहित्य
बुन्देलखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में बुन्देली काव्य साहित्य का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसकी विकास-यात्रा में लोकजीवन, ऐतिहासिक घटनाओं, वीरता, प्रेम, भक्ति और सामाजिक चेतना की विविध अभिव्यक्तियाँ देखने को…
बुंदेली काव्य सौन्दर्य
बुन्देली लोककाव्य बुन्देलखण्ड की लोकसंस्कृति, जनजीवन और भावनात्मक चेतना का सजीव प्रतिबिम्ब है। इसमें कवियों ने सौन्दर्य को विविध रूपों में अभिव्यक्त करते हुए प्रकृति, प्रेम, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक…
Bundeli Lok Vratkathaye बुन्देली लोक व्रतकथायें
बुन्देलखंड में व्रतकथाओं के दो रूप हैं। पहला रूप है पौराणिक जो पुराणो से लिया गया है। दूसरा रूप है व्रतकथा का लोकरूप, जो लोककथा की तरह बुना हुआ है…
Bundeli Lok-gathayen बुन्देली लोक-गाथायें
लोक जीवन में लोक-गाथाएँ बड़े प्रेम और तन्मयता से गायी तथा सुनाई जाती है। यह कथा परक गीत होते हैं। इनमें कहानी गीत के माध्यम से आगे बढ़ती है। इस…
Bundeli Lok-Katha Parampara बुन्देली लोक-कथा परम्परा
बुन्देलखंड की लोककथा लोक द्वारा लोक के लिए लोक से कही जाती है। गाँवों की अथाई में नीम या बरगद के नीचे रात की ब्यारी (Dinner) के बाद, लोककथा कहने-सुनने…
Isuri Ke Ram ईसुरी के राम
मथुरा बृंदावन से वापस आकर महाकवि ईसुरी एक वर्ष तक चित्रकूट में रहे और वहाँ अनेक सतसंगों के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीलाओं को सुना गुना और फिर…
