लोक का अभिप्राय सामान्य जन-जीवन से है। जन-जीवन के अंतर्गत जो भी आता है वह लोक की धरोहर बन जाता है। लोक परंपरा जन-जीवन के अनुभव गुंफित रहते हैं। बुन्देलखंड…
Category: बुन्देलखण्ड का सहित्य

How the folk literature and Hindi literature of Bundelkhand originated and developed and through which stages it reached here today.
Aadhunik Lokkavya Ka Prachalan आधुनिक लोककाव्य का प्रचलन
बुन्देलखंड मे फागों, सैरों और लावनियों की फड़बाजी के कारण Aadhunik Lokkavya Ka Prachalan दो दशक बाद आया। 1921 ई. में मऊरानीपुर (जिला – झाँसी) में एक सत्याग्रह शुरू हुआ…
Bundeli Aadhunik Vividh Lokkavya बुन्देली का आधुनिक विविध लोककाव्य
इस कालखंड में बुन्देली लोकगीतों की विविधता इसलिए मिलती है कि लोक और लोककवि, दोनों लोकचेतना के प्रति सचेत रहे हैं। इसी काल मे Bundeli Aadhunik Vividh Lokkavya फाग,सैर, लावनी, यथार्थपरक,…
Bundeli Aadhunik Shrigarparak Lokkavya बुन्देली का आधुनिक श्रृंगारपरक लोककाव्य
Bundeli Aadhunik Shrigarparak Lokkavya श्रृंगार का भोगोन्मुखी रूप में अधिक उभरा है। उसके लिए आज के मानव-मन की रुचियाँ जिम्मेदार ठहरती हैं।आधुनिक युग मे भौतिकता के मूल्य जहाँ हावी रहे…
Bundeli Aadhunik Bhaktiparak Lokkavya बुन्देली का आधुनिक भक्तिपरक लोककाव्य
बुन्देलखंड की संस्कृति मे भक्ति और खासतौर से लोकभक्ति लोक की आस्था रही है। यही कारण है कि Bundeli Aadhunik Bhaktiparak Lokkavya यहां की संस्कृति का एक अंग है। लोकभक्ति…
Aadhunik Sanskarparak Lokkavya बुन्देली का आधुनिक संस्कारपरक लोककाव्य
वर्तमान परिस्थिति में संस्कार-चेतना और उससे जुड़े लोकगीतों की सार्थकता को स्वीकार न करना ठीक नहीं है। Aadhunik Sanskarparak Lokkavya लोक की संस्कृति का प्रमुख अंग है और लोक की…
Bundeli Rashtriya Chetana ke Lokgeet बुन्देली राष्ट्रीय चेतना के लोकगीत
संघर्षपरकता स्वतन्त्रता पाने का कर्म है, Bundeli Rashtriya Chetana ke Lokgeet देश की दुर्दशा के लोकगीत हैं, जिनमें देश की आर्थिक, प्रशासनिक, अकाल-सम्बन्धी, अंग्रेजों की कूटनीति और चारित्रिक पतन आदि…
Bundelkhand Ka Aadhunik Lokkavya बुन्देलखंड का आधुनिक लोककाव्य
बुन्देलखंड का मध्यकाल जितना साहित्य के प्रति सचेत रहा है, लेकिन Bundelkhand Ka Aadhunik Lokkavya की शुरूआत निरन्तर पिछड़ेपन की ओर जाती रही है। इसके बाद महाकवि केशव ने बीसवीं…
Bundeli Ka Lok Sahitya बुन्देली का लोक साहित्य
लोक साहित्य (Folklore) लोकभाषा का वह साहित्य है, जो अपने अन्तर्निहित लोकत्व के कारण लोकमान्य होकर लोकगृहीत हो गया हो और लोकमुख में जीवित हो। Bundeli Ka Lok Sahitya में…
Bundeli Likhit Lokvachik Parampar बुन्देली की लिखित लोकवाचिक परम्परा
बुन्देलखंड की वे रचनाएँ हैं, जो लोकमुख में नहीं आ सकीं, परन्तु उनमें वे लोकतत्त्व मौजूद हैं, जिनसे कोई रचना लोकमुख में आकर लोकप्रचलित हो जाती है। जिनमें कुछ लोकप्रचलित…
