बनवा लेव पुंगरिया तड़के, आज पिया से अड़के। ऐसी सखियां कोउ न पैरें, गांव भरे से कड़के। हीरा-मोती खूब जड़े हों, भई मोल में बढ़के। कहें ईसुरी प्यारी लाने, धुरी…
Category: ईसुरी की फागें

बुंदेली के विख्यात महाकवि ईश्वरी ने फाग विधा में चौकड़िया फाग की रचना कर बुंदेली साहित्य को एक नई दिशा दी तीसरी का जीवन दर्शन और अध्यात्म ही उनका परिचय है।
तुमने मोह टोर दओ सैंयां, खबर हमारी नैंयां
तुमने मोह टोर दओ सैंयां, खबर हमारी नैंयां। कोचन में हो निबकन लागीं, चुरियन छोड़ी बइयां। सूकी देह छिपुरिया हो गई, हो गए प्रान चलैयां। जे पापिन ना सूखी अंखियां,…
तुम खां रटत रात भर रौवो, और बिछुर गए सोवो
तुम खां रटत रात भर रौवो, और बिछुर गए सोवो। भींजत रात बिछौना अंसुवन, सब दिन करत निचोवो। कांलों कहे तुमें समझावे, नाहक बचपन खोवो। ईसुर बैठ रहे घर अपने,…
जुबना बीते जात लली के, पर गए हात छली के
जुबना बीते जात लली के, पर गए हात छली के। मस्कत रात पुरा पाले में,सरकत जात गली के। कसे रात चोली के भीतर, जैसे फूल कली के। कात ईसुरी मसकें…
जुबना नोकदार प्यारी के, बने बैसबारी के
जुबना नोकदार प्यारी के, बने बैसबारी के। इनने रेजा इतने फारे, गोटा और जारी के। चपेरात चोली के भीतर, नीचे रंग सारी के। ईसुर कात बचन ना पावें, मसक लेव…
गोदे गुदनारी ने गुदना, मिली हमारे जिदना
गोदे गुदनारी ने गुदना, मिली हमारे जिदना। जबरई बांह पकरकें मोरी, कर दए छिदना-छिदना। अंसुआ गिरे आग के ऊपर, भीज गए दोउ जुबना। देखी की दिखनौस बरै वा, घरी आई…
जिदना लौट हेरती नइयां, बुरऔ लगत है गुइयां
जिदना लौट हेरती नइयां, बुरऔ लगत है गुइयां। सूक जात मौं बात कड़त ना, मन हो जात मरैयां। दुविदा होत तौन के डारो, तुम ही जान करइयां। ईसुर पानी भरन…
जानै कौन बाज दिन खाई, मित्र न देत दिखाई
जानै कौन बाज दिन खाई, मित्र न देत दिखाई। दीनी छोड़ लाज परिजन की, कुल की शान गमाई। सास-ससुर छोड़े ससुरे में, चली मायके आई। बरै भाग कोऊ अपनो न…
चलतन परत पैजना छमके, पांवन गोरी धन के
चलतन परत पैजना छमके, पांवन गोरी धन के। सुनतन रोम-रोम उठ आवत, धीरज रहत न तनके। छूटे फिरत गैल-खोरन में, ये सुख्तार मदन के। करवे जोग भोग कुछ नाते, लुट…
कैसे मिटै लगी कौ घाओ, ई की दवा बताओ
कैसे मिटै लगी कौ घाओ, ई की दवा बताओ। दिन या रात चियारें परतीं, ज्वर ना खाए चाओ। गुनिया और नावते हारे, खेल-खेल के माओ। कात ईसुरी कैसे करिए, चलत…
