बुन्देलखण्ड का यह एक कारूणिक कथानक है। इसमें बुंदेली संस्कृति का त्याग, तपस्या और बलिदान दिखाई देता है। इस प्रकार का उच्चादर्श अन्यत्र दुर्लभ है। Hardol ko Sako में देवर-भाभी…
Category: बुन्देलखंड की लोक-गाथायें

People of Bundelkhand have different types of folk songs in life like Dharma Savari, Parsa, Gahnai, Surheen etc.
Rai Praveen Ko Sako राय प्रवीण कौ साकौ
बुंदेलखंड की राजधानी ओरछा और ओरछा नरेश इंद्रजीत के दरबार में राय प्रवीण जैसी विदुषी वाक्चातुर्य नर्तकी का वर्णन Rai Praveen Ko Sako मे दिया गया है। जिनमें कल्पना और इतिहास…
Madhukarshah Ko Sako मधुकरशाह कौ साकौ
बुन्देलखण्ड की प्राचीन राजधानी ओरछा नरेश महाराज मधुकरशाह धार्मिक और भक्ति भावना वाले राजा थे। Madhukarshah Ko Sako मे उनकी भक्ति भावना और दिलेरी का वर्णन है। वे हमेशा माथे…
Mardansingh ko Sako मर्दनसिंह कौ साकौ
बुन्देलखण्ड के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बानपुर नरेश मर्दनसिंह का महत्त्वपूर्ण स्थान है। Mardansingh ko Sako में उनकी वीरता और पराक्रम का वर्णन है। राजा मर्दनसिंह ने झाँसी की…
Karasdev Ko sako कारसदेव कौ साकौ
बुन्देलखण्ड की एक लोक-गाथा परम्परा है। Karasdev Ko sako मे कारसदेव की वीरता और गौ रक्षा के विषय में गुणगान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। बुन्देलखण्ड के हर…
Lakhansingh Ko Rachhro लाखनसिंह कौ राछरौ
कन्नौज के राजा लाखन सिंह के राज में दुश्मनों ने अचानक आक्रमण कर दिया ऐसी स्थिति में नव विवाहिता सुंदर पत्नी को छोड़कर युद्ध भूमि मे जाना पडा। Lakhansingh Ko…
Raja Hindupati Ko Rachhro राजा हिन्दूपति कौ राछरौ
बुन्देलखण्ड के राजाओं में लोहागढ़ के राजा हिन्दूपति का महत्त्वपूर्ण स्थान है। Raja Hindupati Ko Rachhro मे साहस और जिंदादिली का बखान है। उन्होंने वीरता पूर्वक अंग्रेजों की विशाल सेना…
Raja Dhansingh Ko Rachhro राजा धनसिंह कौ राछरौ
यह बुन्देलखंड की प्रमुख लोकगाथा है। Raja Dhansingh Ko Rachhro मे बुंदेली संस्कृति केअनुसार शकुन-अपशकुन को प्रमुख स्थान दिया जाता है। ये सारा अनुभव और भुक्त भोगी लोगों का ज्ञान…
Raja Parichhat ko Rachhro राजा पारीछत कौ राछरौ
सन् 1840 ई. में जैतपुर नरेश पारीछत ने सर्वप्रथम अंग्रेजों के विरूद्ध क्रांति का शंखनाद किया था। Raja Parichhat ko Rachhro मे बुंदेलखंड के सर्वप्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरूआत का…
Rani Laxmibai Ko Rachhro रानी लक्ष्मीबाई कौ राछरौ
लक्ष्मीबाई कौ राछरौ ‘कविवर’ मदनेश जी की बुंदेली भाषा की एक अमूल्य धरोहर है। इसमें ओज और शौर्य का उत्कृष्ट स्वरूप दिखाई देता है। Rani Laxmibai Ko Rachhro में टीकमगढ़…
