बुन्देलखण्ड लोकगीतों की अपनी एक अलग विशेषता है। बुन्देलखण्ड में Bundeli Lok Geeton Ki Vidhayen रितु, पर्व-त्योहारों, संस्कारों एवं खेल परख अनेक विधाएं है। लोक संगीत हमारी भारतीय संस्कृति की…
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Bundelkhand Ke Loknritya बुन्देलखण्ड के लोकनृत्य
बुंदेलखंड में विभिन्न लोकनृत्यों का प्रचलन है। बुंदेली लोक नृत्य में विभिन्न प्रकार के गीतों का गायन होता है। बुंदेलखंड में लोकप्रिय लोकनृत्य मे बधाई नृत्य, बरेदी नृत्य, होली नृत्य,…
Bundeli Jhinjhiya/ Dhiriya बुन्देली झिंझिया/ढिरिया
यह त्योहार बुंदेलखंड का खेल परक लोक पर्व है। Bundeli Jhinjhiya/ Dhiriya एक मटकी के ऊपरी भाग में चारों ओर छेद कर लिए जाते हैं। फिर आधे भाग में राख…
Kanhda /Dhobiyai Nritya कानड़ा/धोबियाई नृत्य
बुन्देलखंड का Kanhda /Dhobiyai Nritya मूलतः जातिगत नृत्य हैं। धोबी समाज के लोग इसे करते है। इसलिए कहीं-कहीं ये नृत्य धुबियाई नृत्य भी कहलाता है। काँनड़ा कान्हा (कृष्ण) से संबंधित…
ईसुरी की संयोग श्रंगारिक फागें
Bundelkhand के महाकवि ईसुरी ने संयोग श्रंगारिक फागों मे जहां नायिका के शरीर शौष्ठव का वर्णन किया है। वही नायिका ने नेत्रों की व्याथा का सौंदर्यबोध का वर्णन भी किया है।…
ईसुरी का सौंदर्य श्रृंगार
महाकविईसुरी नें अति सौंदर्य श्रंगार में कुछ फागे लिख डाली। जिन्हें कुछ लोगों ने अश्लील साहित्य के रूप में प्रचारित किया और महाकवि ईसुरी Mahakavi Isuri को विवादों के पटल…
महाकवि ईसुरी
बुन्देली के विख्यात महाकवि ईसुरी ने फाग विधा मे चौकड़िया फाग की रचना कर बुन्देली साहित्य को एक नई दिशा दी। ईसुरी का जीवन दर्शन और अध्यात्म ही उनका परिचय…
