कच्ची ईंट बाबुल देरी ने धरियो

Kachchi Eent Babul Deri Ne Dhariyo कच्ची ईंट बाबुल देरी ने धरियो, बेटी ने दियो परदेश मोरे लाल । कोना ने तुमखों जनम दये हैं, कौना दये परदेश मोरे लाल…

बुंदेली काव्य सौन्दर्य

बुन्देली लोककाव्य बुन्देलखण्ड की लोकसंस्कृति, जनजीवन और भावनात्मक चेतना का सजीव प्रतिबिम्ब है। इसमें कवियों ने सौन्दर्य को विविध रूपों में अभिव्यक्त करते हुए प्रकृति, प्रेम, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक…

बुन्देलखण्ड के लोकनृत्य

बुन्देलखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति में लोकनृत्यों का विशिष्ट स्थान है। यहाँ के लोकनृत्य जनजीवन की सहज अभिव्यक्ति, सामूहिक उल्लास, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परम्पराओं के सशक्त माध्यम हैं। बुन्देली लोकनृत्यों…

राई-बुन्देलखण्ड का लोक नृत्य   

Bundelkhand Ki Fag Gayki बुन्देलखण्ड की फाग गायकी

बुन्देलखण्ड की फाग गायकी एक लोककाव्य है, लोककाव्य का अपना काव्यशास्त्र होता है। अपनी भाषा, शब्द और छंदयोजना से लेकर भाव-विस्तार तक उसका अपना विधान होता है। उसमें एक लटकनिया…

Bundelkhand ke Tyohar बुन्देलखण्ड के त्यौहार

Bundeli Lokgeet Parampara बुन्देली लोकगीत परम्परा

बुन्देलखंड के लोकजीवन मे उद्भावित तरह- तरह के भावों से उत्पन्न रसानुभूति रचनाओं को जन्म देती  हैं। वही लोकसाहित्य की रचना होती रही है। लोक के धर्म में लोकादर्श, लोकनीति…

ईसुरी की संयोग श्रंगारिक फागें

Bundelkhand के महाकवि ईसुरी ने संयोग श्रंगारिक फागों मे जहां नायिका के शरीर शौष्ठव का वर्णन किया है। वही नायिका ने नेत्रों की व्याथा का सौंदर्यबोध का वर्णन भी किया है।…

ईसुरी का सौंदर्य श्रृंगार

महाकविईसुरी नें अति सौंदर्य श्रंगार में कुछ फागे लिख डाली। जिन्हें कुछ लोगों ने अश्लील साहित्य के रूप में प्रचारित किया और महाकवि ईसुरी Mahakavi Isuri को विवादों के पटल…

महाकवि ईसुरी

बुन्देली  के विख्यात महाकवि ईसुरी ने फाग विधा  मे चौकड़िया फाग की रचना कर बुन्देली साहित्य को एक नई दिशा दी। ईसुरी का जीवन दर्शन और अध्यात्म ही उनका परिचय…