बुन्देलखण्ड का अपना पौराणिक स्थान है। बुन्देलखण्ड में लोकभाषा में सृजन 11वीं शती से होने लगा था और बुन्देली का उद्भव और विकास 982 ई. या 10वीं शती के अन्तिम चरण…
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ईसुरी की संयोग श्रंगारिक फागें
Bundelkhand के महाकवि ईसुरी ने संयोग श्रंगारिक फागों मे जहां नायिका के शरीर शौष्ठव का वर्णन किया है। वही नायिका ने नेत्रों की व्याथा का सौंदर्यबोध का वर्णन भी किया है।…
ईसुरी का सौंदर्य श्रृंगार
महाकविईसुरी नें अति सौंदर्य श्रंगार में कुछ फागे लिख डाली। जिन्हें कुछ लोगों ने अश्लील साहित्य के रूप में प्रचारित किया और महाकवि ईसुरी Mahakavi Isuri को विवादों के पटल…
महाकवि ईसुरी
बुन्देली के विख्यात महाकवि ईसुरी ने फाग विधा मे चौकड़िया फाग की रचना कर बुन्देली साहित्य को एक नई दिशा दी। ईसुरी का जीवन दर्शन और अध्यात्म ही उनका परिचय…
