बीरन ! हो रओ भोर, दूद-सीं डूबन लगीं तरइयाँ ।

भोर बीरन ! हो रओ भोर, दूद-सीं डूबन लगीं तरइयाँ । बड़ी भुजाई ने बखरी कौ, टाल – टकोरा कर लऔं । माते जू के बड़े कुआ कौ, मीठा पानी…

लिख पढ़ लला कलट्टर हुइयो

बाप की सिखावन लिख पढ़ लला कलट्टर हुइयो,हमें चाहें फिर कछू न दिइयो, करौ नौकरी कभउँ काऊ के मों को कौर खैंच जिन खइयो । ऐसौ कठिन समइया आय गऔ,…

आज हिमालय की छाती में, गतकौ लगौ करारौ

पूजा करें मनुजता की सब  आज हिमालय की छाती में, गतकौ लगौ करारौ । जाति धरम को भाव भूल कें, अपनो देश सँमारौ ।। भारत की माँटी में फूलौ, हरदम…

जन्म मोरौ असुवा ढारत गव

जनम मोरौ असुवा ढारत गव । विधाता जानें का कर रव ।। घाव लगे साँमें छाती में जे सब हैं अपनन के । महल खड़ैरा हो गय ओजू । सोचे…

गाँव हमाए सुरग लोक से, ओजू साँसी मानों

गाँव हमाए सुरग लोक से, ओजू साँसी मानों । बिरछन तरें हरी काँदी, परतन लगै सुहानों ।। भुका भुके में चलै बैर, बिजना सौ आन डुलावै । ओइ सब खेतन…

कठिन जेठ को घाम तचैं गुस्सा में सूरज

कठिन जेठ को घाम तचैं गुस्सा में सूरज बरजोरा बिलमौ पहूज के नीरें – तीरें आठ दिना कढ़ गए न एकउ फँसे बटोही दार चून घी निगट रहे हैं धीरे-धीरें…

बुंदेली बरा-बरी की नहिं कउँ बराबरी है 

बुन्देलखण्ड की संस्कृति में ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना का विशेष महत्त्व है। यहाँ अतिथि को देवतुल्य मानकर उसका आदर-सत्कार करना लोकजीवन की पुरानी परंपरा रही है। मेहमानों की आवभगत,…

डॉ. दुर्गेश दीक्षित की रचनाएं

कविवर Dr. Durgesh Dixit का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी सोमवार, संवत् 1995 को ग्राम कुण्डेश्वर जिला टीकमगढ़ (मप्र.) में श्रीमती रामकुँवर देवी की कुक्षि से हुआ। इनके पिता श्री…