महाकवि ईसुरी के फाग साहित्य में Isuri Ki Nayika Rajau को सर्वमान्य स्वीकारोक्ति प्राप्त है। रजऊ कौन है? ईसुरी से उनका ताल्लुकात क्या रहा है? इसके सम्बंध में साहित्यकार एकमत…
Category: ईसुरी की फागें

बुंदेली के विख्यात महाकवि ईश्वरी ने फाग विधा में चौकड़िया फाग की रचना कर बुंदेली साहित्य को एक नई दिशा दी तीसरी का जीवन दर्शन और अध्यात्म ही उनका परिचय है।
द्विज धीरे खां ईसुर, पौंचाई परनाम
धीरे पंडा और ईसुरी के बीच घनिष्ठ मित्रता थी । धीरे पंडा कवि नहीं थे वह एक सुप्रसिद्ध गायक आवश्यक है स्वयं ईसुरी ने उनकी प्रशंसा में कुछ फागें लिखी…
ढपला रमतूला तुरइ, अलगोजा की टेक
कुण्डलियाँ ढपला रमतूला तुरइ, अलगोजा की टेक। मिलके बजै कसावरी, सब बाजन में एक।। सब बाजन में एक पालकी पीनस आवै । गांव के नायकन कीनों सुख सम्बन्द ।। थोरौ…
स्वामी से सेवक सकुच, विनय करत करजोर
कुण्डलियाँ स्वामी से सेवक सकुच, विनय करत करजोर। मरजी माफक फर्द की, लगै सौ अरजी मोर। लगै सौ अरजी मोर, सुतर आगे को धावें। नाय माय की खबर, खुशी खातिर…
करके नेह टोर जिन दईयो, दिन-दिन और बढ़इयो
करके नेह टोर जिन दईयो, दिन-दिन और बढ़इयो। जैसे मिले दूध में पानी, उसई मनै मिलइयो। हमरो और तुम्हारो जो जिउ एकई जाने रइयो। कात ईसुरी बांह गहे की, खबर…
ऐंगर बैठ लेव कछु काने, काम जनम भर राने
ऐंगर बैठ लेव कछु काने, काम जनम भर राने। बिना काम को कोऊ नइयां, कामें सब खां जाने। जौन काम खां करने नैंयां, कईयक होत बहाने। जौ जंजाल जगत कौ…
आओ को अमरौती खाकें, ई दुनियां में आकें
आओ को अमरौती खाकें, ई दुनियां में आकें। नंगे गैल पकर गए धर गए, का करतूत कमाकें। जर गए बर गए धुन्धक लकरिया, धर गए लोग जराके। बार-बार नई जनमत…
अब दिन गौने के लग आये, हमने कईती काए
अब दिन गौने के लग आये, हमने कईती काए। सुसते नई काम के मारें, ऐंगर बैठ न पाए। आसों साल वियाब भये ते, परकी साल चलाए। तेवरस साल विदा की…
रस्ता आधी रात लौ हेरी, छैल बेदरदी तेरी।
रस्ता आधी रात लौ हेरी, छैल बेदरदी तेरी। तलफत रही पपीहा जैसी, कहां लगाई देरी। भीतर से बाहर हो आई, दै-दै आई फेरी। उठ-उठ भगी सेज सूनी से, आंख लगी…
हम पै बैरिन बरसा आई, हमें बचा लेव भाई
हम पै बैरिन बरसा आई, हमें बचा लेव भाई। चढ़कें अटा घटा न देखें, पटा देव अगनाई। बरादरी दौरियन में हो, पवन न जावे पाई। जै दु्रम कटा छटा फुलबगिया,…
