बुंदेलखण्ड के ‘साकों’ की रचना का मूल आधार तो प्रशंसा ही है, किसी भी व्यक्ति विशेष के बारे में बढ़ा चढ़ा कर लिखना, उस व्यक्ति का गुणगान करना, उस व्यक्ति…

बुंदेलखण्ड के ‘साकों’ की रचना का मूल आधार तो प्रशंसा ही है, किसी भी व्यक्ति विशेष के बारे में बढ़ा चढ़ा कर लिखना, उस व्यक्ति का गुणगान करना, उस व्यक्ति…