चंदेल-काल में 8वीं-9वीं शती के मध्य बुंदेली लोकभाषा ने जन्म लिया था, पर चंदेलों की राजभाषा संस्कृत थी। इस कारण राजदरबार की तरफ से लोक गायकी को देर से प्रश्रय…
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Bundelkhand Ke Loknritya बुन्देलखण्ड के लोकनृत्य
बुंदेलखंड में विभिन्न लोकनृत्यों का प्रचलन है। बुंदेली लोक नृत्य में विभिन्न प्रकार के गीतों का गायन होता है। बुंदेलखंड में लोकप्रिय लोकनृत्य मे बधाई नृत्य, बरेदी नृत्य, होली नृत्य,…
Bundeli Jhinjhiya/ Dhiriya बुन्देली झिंझिया/ढिरिया
यह त्योहार बुंदेलखंड का खेल परक लोक पर्व है। Bundeli Jhinjhiya/ Dhiriya एक मटकी के ऊपरी भाग में चारों ओर छेद कर लिए जाते हैं। फिर आधे भाग में राख…
Kanhda /Dhobiyai Nritya कानड़ा/धोबियाई नृत्य
बुन्देलखंड का Kanhda /Dhobiyai Nritya मूलतः जातिगत नृत्य हैं। धोबी समाज के लोग इसे करते है। इसलिए कहीं-कहीं ये नृत्य धुबियाई नृत्य भी कहलाता है। काँनड़ा कान्हा (कृष्ण) से संबंधित…
Bundelkhand Ki Fag Gayki बुन्देलखण्ड की फाग गायकी
बुन्देलखण्ड की फाग गायकी एक लोककाव्य है, लोककाव्य का अपना काव्यशास्त्र होता है। अपनी भाषा, शब्द और छंदयोजना से लेकर भाव-विस्तार तक उसका अपना विधान होता है। उसमें एक लटकनिया…
Bundeli Lokgeet Parampara बुन्देली लोकगीत परम्परा
बुन्देलखंड के लोकजीवन मे उद्भावित तरह- तरह के भावों से उत्पन्न रसानुभूति रचनाओं को जन्म देती हैं। वही लोकसाहित्य की रचना होती रही है। लोक के धर्म में लोकादर्श, लोकनीति…
Bundeli Lok Vratkathaye बुन्देली लोक व्रतकथायें
बुन्देलखंड में व्रतकथाओं के दो रूप हैं। पहला रूप है पौराणिक जो पुराणो से लिया गया है। दूसरा रूप है व्रतकथा का लोकरूप, जो लोककथा की तरह बुना हुआ है…
