Bundeli Lok Kathayen-Parichay बुन्देली लोक कथाएँ-परिचय

बुन्देली लोकसाहित्य का एक प्रमुख अंग वहाँ पर पायी जाने वाली Bundeli Lok Kathayen हैं। प्रस्तुत है Bundeli Lok Kathayen-Parichay , प्राचीन काल से ही गाँवों में मनोरंजन के लिए, आधुनिक साधनों…

Mehnat Ko Fal मेहनत को फल-बुन्देली लोक कथा

एक गाँओं में एक किसान रहत तो । बाय Mehnat Ko Fal समझ में आत तो बाके मोडन खों नाईं । बाके तीन मोड़ा हते, तीनई भोत अलाल थे। भओ…

Mindo Medhaki मिन्दो मेंढकी – बुन्देली लोक कथा

एक इकरिया थी। बा एक दिना धूरा में गाँकड़ें बना रई थी । इत्ते में Mindo Medhaki भाँ आई । बाने डुकरिया से कई, “डुक्को – डुक्को धूरा में गाँकड़ें…

Mijban मिजबान-बुन्देली लोक कथा

एक  परबार में पति-पत्नी रहत थे। दोई बड़े प्रेम से अपनो जीबन बिता रए थे। एक बार का भओ – बिनके घर Mijban आए, मिजबान आए तो दोई बड़े खुस…

Mahathag महाठग-बुन्देली लोक कथा

एक जीजा के चार सारे रहत हैं। जीजा रहत हे नग और  चारई सारे रहत हैं Mahathag । बे जीजा हे तंगात रहत हैं। कछु भी माँगबे  चले आत हैं,…

Lakhtakiya लखटकिया-बुन्देली लोक कथा

एक बुधिया हती बाको एक मोड़ा हतो बाको नाम “लखटकिया “ । बो गाँओं में पटेल के ढोर चरात तो । एक बार बो ढोरा चरा रओ तो  , भई…

Patta Bhar Bhatta पत्ता भर भत्ता-बुन्देली लोक कथा

एक गाँओं में दो भइया रहत थे। बड़े को नाम कुन्दन, छोटे को नाम नन्दन हतो । बे भोतई गरीब हते। बे गाँओं में मेहनत मजूरी करके अपनो पेट भरत…

Panda Pahalwan पण्डा पहलवान-बुन्देली लोक कथा

गंगा किनारे एक गाँओं हतो किसनपुर। जा गाँओं के लोग राधाकिसनजी के भोत भक्त थे। बिनने गाँओं में राधाकिसन को मन्दिर बनबाओ । मन्दिर बन गओ तो पूजा के लाने…

Dilli Ki Gapp दिल्ली की गप्प-बुन्देली लोक कथा

आज एक किस्सा सुना राये Dilli Ki Gapp । एक हतो  दिल्ली को पहलबान, बाय  अपनी ताकत पे भोत गुमान हतो । बाने भोत से दंगल जीते थे। दिल्ली के असफेर…