एक बार फिर मुझे यानि Narayan Chauhan को अपने बारे में सोचने और लिखने का मौका मिला, और मेरी पूरी कोशिश है कि मैं अपनी पूरी ईमानदारी के साथ अपने…
Tag: Bundelkhand Gaurav
बुन्देलखण्ड के लोकनृत्य
बुन्देलखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति में लोकनृत्यों का विशिष्ट स्थान है। यहाँ के लोकनृत्य जनजीवन की सहज अभिव्यक्ति, सामूहिक उल्लास, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परम्पराओं के सशक्त माध्यम हैं। बुन्देली लोकनृत्यों…
Bundeli Ka Udbhav aur Vikas बुन्देली का उद्भव और विकास
बुन्देलखण्ड का अपना पौराणिक स्थान है। बुन्देलखण्ड में लोकभाषा में सृजन 11वीं शती से होने लगा था और बुन्देली का उद्भव और विकास 982 ई. या 10वीं शती के अन्तिम चरण…
ईसुरी की संयोग श्रंगारिक फागें
Bundelkhand के महाकवि ईसुरी ने संयोग श्रंगारिक फागों मे जहां नायिका के शरीर शौष्ठव का वर्णन किया है। वही नायिका ने नेत्रों की व्याथा का सौंदर्यबोध का वर्णन भी किया है।…
