बजीर मूलतः बुंदेली के कवि थे। जन-जीवन और बुंदेलखंड के परिवेश को और संस्कारों को उन्होंने बहुत नजदीक से देखा था, अनुभव किया था वह सब उनकी कविता में स्पष्ट…

बजीर मूलतः बुंदेली के कवि थे। जन-जीवन और बुंदेलखंड के परिवेश को और संस्कारों को उन्होंने बहुत नजदीक से देखा था, अनुभव किया था वह सब उनकी कविता में स्पष्ट…