‘‘Mai ! ऐसी क्या मजबूरी है, जो इस उम्र में तुम्हें चोरी करने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है?’’ मैं वृद्धा माई का हाथ यदि मजबूती से न पकड़े…
Tag: महेंद्र भीष्म
Bade Sab बड़े साब
प्लेटफार्म पर चहल-कदमी करते एक घंटे से ज्यादा लोग समय व्यतीत हो चुका था। साबरमती एक्सप्रेस सही समय से आ रही थी, पर अब लेट हो रही है। ट्रेन पिछले…
