Sanyogita Swayambar संयोगिता स्वयंवर

कन्नौज नैमिषारण्य के पास बसा है। वहाँ के राजा अजयपाल के जयचंद और रतीभान दो प्रतापी पुत्र थे। जयचंद राठौरवंशी राजपूत थे। उनकी पुत्री संयोगिता जब विवाह योग्य हुई तो…

Raja Parimal Rai Ka Vivah राजा परिमाल राय का विवाह -कथानक

चद्रवंशी राजाओं की राजधानी सिरसागढ़ थी। किले का नाम कालिंजर था। चंद्रवंशी क्षत्रिय अब चंदेले कहलाते थे। उनकी राजधानी को चंदेरी भी कहा जाता था। चंदेले राजा कीर्ति राय का…

Alhakhand Yoddhao Ka Parichay आल्हाखण्ड योद्धओं का परिचय

आल्हाखंड के कथानक का विस्तार अद्भुत है। Alhakhand Yoddhao Ka Parichay अपने आप मे आलौकिक और शौर्य पूर्ण है।  उसमें आल्हा, उनके पिता और उनके पुत्र तीन पीढ़ियों की कथा…

Alha kathanak आल्हा कथानक

आल्हाखंड के कथानक का विस्तार अद्भुत है। उसमें आल्हा, उनके पिता और उनके पुत्र तीन पीढ़ियों की कथा को एक साथ समावेश Alha kathanak मे किया गया है। उसकी घटनाएँ…

Alha Rachaita Mahakavi Jagnik आल्हा रचयिता महाकवि जगनिक

आल्हाखंड लोकप्रबन्ध या साहित्यिक प्रबन्ध है या गाथा, यह विवाद बहुत पहले से चलता रहा है और उसी के साथ Alha Rachaita Mahakavi Jagnik के अस्तित्व का प्रश्न भी उठता…

Alha- Bundeli Lok Mahakaavy आल्हा- बुन्देली लोक महाकाव्य

बुन्देलखंड की ‘आल्हा’ लोकगाथा अपने असाधारण प्रभाव ओैर लोकप्रियता के कारण भारत के ‘राष्ट्रीय लोकमहाकाव्य’ के रूप में ढल गई है।Alha- Bundeli lok Mahakaavy की रचना महाकवि जगनिक ने की…

आल्हा-उदल बुन्देली शौर्य कथा