गुणसागर शर्मा सत्यार्थी की रचनाएं अनेक विश्वविद्यालयों मे हिन्दी स्नातक के छात्रों को पढ़ाई जाती हैं । साहित्य तीर्थ चिरगांव जिला झांसी उत्तर प्रदेश में श्रावण शुक्ल एकादशी 1994 विक्रमी को…
Category: बुन्देलखण्ड का सहित्य

How the folk literature and Hindi literature of Bundelkhand originated and developed and through which stages it reached here today.
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ की रचनाएं
बुन्देलखण्ड के साहित्यकार Rajeev Namdev ‘Rana Lidhauri’ Ki Rachanayen बुन्देली संस्कृति की अद्भुत रचनाएं हैं जिन्हे जनमानस का असीम प्रेम मिला। राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ की रचनाएं जन मानस के…
पानीदार पानी-बुंदेली व्यंग
इ घोर कलजुग में अब आदमी गलत काम करत भए या लाबरी बोलतइ पकरे जाने पै ‘पानी-पानी’ नइं होत है। आज कौं आदमी पानीदार नइं रओ एइसें अब Panidar Pani…
बुन्देली लोक कथाएँ-परिचय
बुन्देली लोकसाहित्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं समृद्ध अंग बुन्देली लोककथाएँ हैं। ये लोककथाएँ बुन्देलखण्ड की लोकजीवन-परम्पराओं, सामाजिक मान्यताओं, रीति-रिवाजों, आस्थाओं और सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्त करती हैं। प्राचीन काल…
लल्लू चोर- बुन्देली लोक कथा
एक हतो लल्लू, अकल से थो बो बुद्धू लेकिन गलती सें बनगओ Lallu Chor । बो कछु काम-धाम करत नई हतो , दिन भर आबारा जैसो घूमत रहत एक बार…
मेहनत को फल-बुन्देली लोक कथा
एक गाँओं में एक किसान रहत तो । बाय Mehnat Ko Fal समझ में आत तो बाके मोडन खों नाईं । बाके तीन मोड़ा हते, तीनई भोत अलाल थे। भओ…
मिन्दो मेंढकी – बुन्देली लोक कथा
एक इकरिया थी। बा एक दिना धूरा में गाँकड़ें बना रई थी । इत्ते में Mindo Medhaki भाँ आई । बाने डुकरिया से कई, “डुक्को – डुक्को धूरा में गाँकड़ें…
मिजबान-बुन्देली लोक कथा
एक परबार में पति-पत्नी रहत थे। दोई बड़े प्रेम से अपनो जीबन बिता रए थे। एक बार का भओ – बिनके घर Mijban आए, मिजबान आए तो दोई बड़े खुस…
महाठग-बुन्देली लोक कथा
एक जीजा के चार सारे रहत हैं। जीजा रहत हे नग और चारई सारे रहत हैं Mahathag । बे जीजा हे तंगात रहत हैं। कछु भी माँगबे चले आत हैं,…
लखटकिया-बुन्देली लोक कथा
एक बुधिया हती बाको एक मोड़ा हतो बाको नाम “लखटकिया “ । बो गाँओं में पटेल के ढोर चरात तो । एक बार बो ढोरा चरा रओ तो , भई…
