पदशैली की फाग- बुन्देली लोक गायन

रागबद्ध पदों में होरी या फाग-गीत भी रचे गए और उनका अनुसरण लोककवियों ने भी किया, जिसके फलस्वरूप 16 वीं शती में पदशैली की फाग का आविर्भाव हुआ। इस फागरूप…

ढप की फाग- बुन्देली लोक गायन

’दफ‘ अरबी शब्द से डफ या ढप बना है। संभव है कि यह बाद्य बुन्देलखंड में मुसलमानों या पठानों के आने के बाद ही प्रचलित हुआ हो। इस फाग के…

झूलना की फाग- बुन्देली लोक गायन

बुन्देली लोक  विधा झूलना की फाग Jhulana ki Fag में डेढ़ कड़ी होने के कारण इसे डिढ़-खुरयाऊ भी कहते हें। खुर शब्द फाग के चरण का संकेत करता है। प्रथम…

छंदयाऊ लाउनी फाग- बुन्देली लोक गायन

बुन्देलखण्ड की छंदयाऊ लाउनी फाग Chhandyau Launi Fag का यह फागरूप विभिन्न छन्दों के प्रयोग से उदित हुआ है। वर्तमान में प्रचलित इस फाग में टेक चैकड़िया की होती है,…

चौकड़िया फाग- बुन्देली लोक गायन

चौकड़िया फाग Chaukadiya Fag लोककाव्य के पुनरूत्थान-काल अर्थात् 19 वीं शती के अंतिम चरण की देन है। लोककवि ईसुरी चौकड़िया फाग के जनक माने जाता है। उसके प्रत्येक चरण में…

चौकड़िया फाग की वस्तुगत विशेषता

चौकड़िया फाग की वस्तुगत विशेषता Chaukadiya Fag Ki Vastugat Visheshta फागों की प्रधान प्रवृत्ति लोक शृंगारिकता की विशिष्टता है, जो रीतिकालिक शृँगारिकता की रूढ़िबद्धता के विरुद्ध प्रतिक्रियास्वरूप फूटी है। साथ…

चौकड़िया फाग की शिल्पगत विशेषता

चौकड़िया के आविष्कार ने गायकी और फड़बाजी, दोनों को गति प्रदान की है। चौकड़िया फाग की शिल्पगत विशेषता Chaukadiya Fag Ki Shilpgat Visheshta ईसुरी ने पुरानी ‘लाल’ फाग से अन्तरा…

Gangadhar Vyas Ki Chaukadiya गंगाधर व्यास की चौकड़ियां

कवि गंगाधर व्यास जी कवित्त, शैर, ख्याल और Gangadhar Vyas Ki Chaukadiya प्रचलित छन्दों में रचनायें हैं। वे फड़ (प्रतिद्वन्दी) साहित्य के सृजन में अधिक रुचि रखते थे।कवि श्री गंगाधर व्यास…

Faggeet Aur Fagkar फागगीत और फागकार

बुन्देलखंड के लोकोत्सवी Faggeet Aur Fagkar के लिये सुनहरा काल खंड था  इस कालखंड के फागगीत ‘चौकड़िया’ फागों की गायकी के आविष्कार का श्रेय लोककवि  ‘ईसुरी’ को है। चार कड़ियाँ…