हमारे लमटेरा की तान, समझ लो तीरथ कौ प्रस्थान

लमटेरा की तान हमारे लमटेरा की तान, समझ लो तीरथ कौ प्रस्थान, जात हैं बूढ़े-बारे ज्वान, जहाँ पै लाल धुजा फहराय। नग-नग देह फरकबै भइया, जो दीवाली गाय।। दिवारी आई…

मिठउवा है ई कुआ कौ नीर, छाँयरी पीपर कौ गंभीर

गौरीबाई मिठउवा है ई कुआ कौ नीर, छाँयरी पीपर कौ गंभीर, मिटा ले तनिक घाम की पीर, ओ पानी पीले गैलारे, तनिक बैठ के तुम सुस्ता लेव, जानै फिर जा…

Santosh Singh Bundela संतोष सिंह बुंदेला

बुन्देलखंड अंचल ग्राम संस्कृति और भावनात्मक भाषा से समृध भूभाग मे Santosh Singh Bundela जैसे रचना कार ने जन मानस के भावों का चित्रण अपनी कविता के माध्यम से करके…