द्विज धीरे खां ईसुर, पौंचाई परनाम

धीरे पंडा और ईसुरी के बीच घनिष्ठ मित्रता थी । धीरे पंडा कवि नहीं थे वह एक सुप्रसिद्ध गायक आवश्यक है स्वयं ईसुरी ने उनकी प्रशंसा में कुछ फागें लिखी…

ढपला रमतूला तुरइ, अलगोजा की टेक

कुण्डलियाँ ढपला रमतूला तुरइ, अलगोजा की टेक। मिलके बजै कसावरी, सब बाजन में एक।। सब बाजन में एक पालकी पीनस आवै । गांव के नायकन कीनों सुख सम्बन्द ।। थोरौ…

स्वामी से सेवक सकुच, विनय करत करजोर

कुण्डलियाँ स्वामी से सेवक सकुच, विनय करत करजोर। मरजी माफक फर्द की, लगै सौ अरजी मोर। लगै सौ अरजी मोर, सुतर आगे को धावें। नाय माय की खबर, खुशी खातिर…