Mahathag महाठग-बुन्देली लोक कथा

एक जीजा के चार सारे रहत हैं। जीजा रहत हे नग और  चारई सारे रहत हैं Mahathag । बे जीजा हे तंगात रहत हैं। कछु भी माँगबे  चले आत हैं,…

Lakhtakiya लखटकिया-बुन्देली लोक कथा

एक बुधिया हती बाको एक मोड़ा हतो बाको नाम “लखटकिया “ । बो गाँओं में पटेल के ढोर चरात तो । एक बार बो ढोरा चरा रओ तो  , भई…

Patta Bhar Bhatta पत्ता भर भत्ता-बुन्देली लोक कथा

एक गाँओं में दो भइया रहत थे। बड़े को नाम कुन्दन, छोटे को नाम नन्दन हतो । बे भोतई गरीब हते। बे गाँओं में मेहनत मजूरी करके अपनो पेट भरत…

Panda Pahalwan पण्डा पहलवान-बुन्देली लोक कथा

गंगा किनारे एक गाँओं हतो किसनपुर। जा गाँओं के लोग राधाकिसनजी के भोत भक्त थे। बिनने गाँओं में राधाकिसन को मन्दिर बनबाओ । मन्दिर बन गओ तो पूजा के लाने…

Dilli Ki Gapp दिल्ली की गप्प-बुन्देली लोक कथा

आज एक किस्सा सुना राये Dilli Ki Gapp । एक हतो  दिल्ली को पहलबान, बाय  अपनी ताकत पे भोत गुमान हतो । बाने भोत से दंगल जीते थे। दिल्ली के असफेर…

Jaise Ko Taisa जैसे को तैसा-बुन्देली लोक कथा

एक माताराम हतीं  बाको एकई मोड़ा हतो । जब मोड़ा बड़ो हो गओ तो माताराम ने मोड़ा को धूमधाम से व्याव कर दओ ।  माताराम ने मोड़ा के लाने किराने…

Jadui Sankh जादुई संख-बुन्देली लोक कथा

गाँओं में एक साधु बाबा रहत थे। बिनकी कुटिया गाँओं से बाहर नदी के किनारे थी। साधू बाबा के पास एक  Jadui Sankh हतो । एक आदमी बिनको चेला हतो…

Chida-Chidi चिड़ा-चिड़ी-बुन्देली लोक कथा

इमली के पेड़ पर Chida-Chidi रहते थे। एक दिना कहीं से, चिड़ा लाओ दाल को दाना और  चिड़ी लाई चाबल को दाना दोई ने मिलके हड़िया में खिचड़ी पकाई ।…

Bundeli Lok Vratkathaye बुन्देली लोक व्रतकथायें

बुन्देलखंड में व्रतकथाओं के दो रूप हैं। पहला रूप है पौराणिक जो पुराणो से लिया गया है। दूसरा रूप है व्रतकथा का लोकरूप, जो लोककथा की तरह बुना हुआ है…

Bundeli Lok-Katha Parampara बुन्देली लोक-कथा परम्परा

बुन्देलखंड की लोककथा लोक द्वारा लोक के लिए लोक से कही जाती है। गाँवों की अथाई में नीम या बरगद के नीचे रात की ब्यारी (Dinner) के बाद, लोककथा कहने-सुनने…