महाकवि ईसुरी की पहचान एक प्रसिद्ध फगुआरे के रूप में है, किन्तु उनकी साहित्यिक प्रतिभा केवल फागों तक ही सीमित नहीं थी। उन्होंने फागों के अतिरिक्त दोहा, कुण्डलियाँ, छन्द आदि…
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महाकवि ईसुरी की सामाजिक चेतना की फागें
महाकवि ईसुरी ने लोकजीवन की विभिन्न समस्याओं, जैसे शादी-विवाह, सुख-दुःख, तकलीफ, बीमारी तथा बुरी आदतों के दुष्परिणामों का अपनी फागों में उल्लेख करते हुए जनमानस को सचेत और जागरूक किया…
महाकवि ईसुरी की वियोग श्रृँगारिक फागें
महाकवि ईसुरी की फागों में संयोग श्रृंगार के साथ-साथ वियोग श्रृंगार का भी अत्यंत मार्मिक और सजीव चित्रण मिलता है। जिस सहजता और भावप्रवणता के साथ उन्होंने प्रेम-मिलन की अनुभूतियों…
महाकवि ईसुरी की संयोग श्रंगारिक फागें
महाकवि ईसुरी की संयोग श्रृंगारिक फागों में नायिका के शारीरिक सौंदर्य और अंग-प्रत्यंग की मनोहारी छटा का सजीव चित्रण मिलता है। उन्होंने नायिका के रूप-सौंदर्य का वर्णन करने के साथ-साथ…
महाकवि ईसुरी का सौंदर्य श्रृंगार
महाकवि ईसुरी की फागों में सौंदर्य और श्रृंगार महाकवि ईसुरी की फागों में सौंदर्य और श्रृंगार का अत्यंत सजीव, स्वाभाविक एवं प्रभावशाली चित्रण मिलता है। उन्होंने मानवीय प्रेम, रूप-सौंदर्य और…
