Gatagat Ki Fagen गतागत की फागें

396
Gatagat Ki Fagen गतागत की फागें
Gatagat Ki Fagen गतागत की फागें

बुन्देली फाग साहित्य में जिन फागों को उल्टा और सीधा पढ़ने पर एक ही अर्थ का बोध हो उसे गतागत Gatagat Ki Fagen कहते है। गतागत का लक्ष्य बताते हुए आचार्य केशवदास लिखते हैं कि-

उलटौ धौ बाचिये एकहि अर्थ प्रमान ।

कहत गतागत ताहि कवि, केशव दास सुजान।।

गतागत की एक फाग का उदाहरण

धा धा धा राधा, धा राधा, धारा आ, आ राधा ।

धागा, अखिल अगम खल खा, खा, लग मग अलखि अगाधा ।

धा दास का धरा रह ला ला, हर राधका सदाधा।।

गंगाधर की चौकड़िया