खजुराहो अपने भव्य मंदिरों के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन यहां का वामन मंदिर Vaman Mandir अपनी अलग पहचान रखता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के वामन अवतार को समर्पित है और अपनी बारीक नक्काशी व स्थापत्य कला के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
करीब 1050–1075 ई. के बीच चंदेल शासकों द्वारा निर्मित यह मंदिर लगभग एक हजार साल पुराना है। गर्भगृह में चतुर्भुजी वामन प्रतिमा स्थापित है, जिसके साथ चक्रपुरुष और शंखपुरुष का अंकन है। हालांकि प्रतिमा खंडित होने के कारण यहां नियमित पूजा नहीं होती।
वामन मंदिर की मुख्य विशेषताएं
1- निर्माण काल: 1050–1075 ईस्वी
2- चंदेल शासकों द्वारा निर्मित
3- सप्तरथ शैली का भू-विन्यास
4- गर्भगृह, अंतराल, मंडप और मुखमंडप संरचना
5- प्रवेश द्वार पर गंगा-यमुना, द्वारपाल और सप्तशाखा अलंकरण
6- बाहरी दीवारों पर सुंदरियों और देव प्रतिमाओं की दो पंक्तियां खजुराहो के पूर्वी समूह में स्थित है।
वीथिकाओं के अतिरिक्त इस मन्दिर के अन्य किसी अंग में मिथुन-चित्रण नही हैं और इस दृष्टि से यह खजुराहो के अन्य मन्दिरों से भिन्न है। इसकी जंधा में मूर्तियों की मात्र दो पंक्तियाँ हैं, अन्य मन्दिरों की तरह तीन नहीं । इसकी एक अन्य विशेषता यह भी है कि इसके महामण्डप के ऊपर सवरणा छत है और महामण्डप के गवाक्षों के बितान में शालभंजिकाएँ प्रदर्शित हैं।
गर्भगृह में विष्णु के वामन अवतार की 4 फुट 8 इंच ऊँची मूर्ति प्रतिष्ठित है । यह मन्दिर कन्दरिया के बाद और आदिनाथ के पूर्व का प्रतीत होता है। इमकी निर्माण-तिथि 1050-75 ई० मानी जा सकती है ।
