‘खंड बुंदेला देख’ Khand Bundela Dekh कृति की सारी कल्पना – परिकल्पना के सारे आधार और साकोचार लोक की कहावतें, किंवदंतियां, उक्तियां – सूक्तियां और सुनी – गुनी प्रयुक्तियां हैं।…
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कहा न अबला कर सकै, का नई सिन्धु समाय
लक्ष्मीबाई रासो कहा न अबला कर सकै, का नई सिन्धु समाय । कहा न पावक में जरै, काकों काल न खाय । जननी जन्मै भक्त सुत, कै दाता कै सूर…
रावन दहन होत हर सालै, तौऊ रावन बड़रय
रावन दहन होत हर सालै रावन दहन होत हर सालै, तौऊ रावन बड़रय । बैर भाव हिंसा अनीति, मानुश खों ऐंन जकड़रय ।। पुतरा बड़ौ बनौ रावन कौ मानों बड़ी…
उनकें रोजउँ मनें दिबारी, मोरे घरै धँधक रइ होरी
मोरे घरै धँधक रइ होरी उनकें रोजउँ मनें दिबारी, मोरे घरै धँधक रइ होरी । उनकी पौर अटारी हँस रइ, सूनी डरी टपरिया मोरी ।। वैतो हलुआ रबड़ी सूँटें, दूध…
ईये कोउ कम नई जानौं, जा बुन्देलन की धरती
जा बुन्देलन की धरती 1 ईये कोउ कम नई जानौं, जा बुन्देलन की धरती । फूलई फूल लगे रत रोजऊ, डारन धारन फरती ।। हरी-हरी दूबा की पैरैं, हरी गुल…
बीरन ! हो रओ भोर, दूद-सीं डूबन लगीं तरइयाँ ।
भोर बीरन ! हो रओ भोर, दूद-सीं डूबन लगीं तरइयाँ । बड़ी भुजाई ने बखरी कौ, टाल – टकोरा कर लऔं । माते जू के बड़े कुआ कौ, मीठा पानी…
लिख पढ़ लला कलट्टर हुइयो
बाप की सिखावन लिख पढ़ लला कलट्टर हुइयो,हमें चाहें फिर कछू न दिइयो, करौ नौकरी कभउँ काऊ के मों को कौर खैंच जिन खइयो । ऐसौ कठिन समइया आय गऔ,…
आज हिमालय की छाती में, गतकौ लगौ करारौ
पूजा करें मनुजता की सब आज हिमालय की छाती में, गतकौ लगौ करारौ । जाति धरम को भाव भूल कें, अपनो देश सँमारौ ।। भारत की माँटी में फूलौ, हरदम…
जन्म मोरौ असुवा ढारत गव
जनम मोरौ असुवा ढारत गव । विधाता जानें का कर रव ।। घाव लगे साँमें छाती में जे सब हैं अपनन के । महल खड़ैरा हो गय ओजू । सोचे…
गाँव हमाए सुरग लोक से, ओजू साँसी मानों
गाँव हमाए सुरग लोक से, ओजू साँसी मानों । बिरछन तरें हरी काँदी, परतन लगै सुहानों ।। भुका भुके में चलै बैर, बिजना सौ आन डुलावै । ओइ सब खेतन…
