ऊंट बिलैया ले गई सो हांजू- हांजू कइये

बुंदेलखण्ड में यह उक्ति किसी सहज कहावत की तरह ही लोकप्रिय है। कवि ने चाटुकार लोगों को शब्द प्रहार करते हुए उनका चरित्र चित्रण किया है , Oont Bilaiya Le…

अपनो देस बुन्देलन बारो

अपनो देस बुन्देलन बारो अपनो देस बुंदेलन बारो । Apno Des Bundelan Baro.   महतारी बुन्देलन भूमि, है सूरज पिता हमारो । अपनो देस बुंदेलन बारो ॥   अभउँ बुंदेल खण्ड…

Prabhudayal Shrivastav Ki Bundeli Kavitayen प्रभुदयाल श्रीवास्तव की बुन्देली कविताएं

बुंदेली चौकड़िया (पानी बरसत न‌इँयां) जाने का हैं राम कर‌इँयां , पानी बरसत न‌इँयां। आईं न‌इँ जमड़ार जामनें , ससकन लगीं तल‌इँयां। सूने लगें खेत फसलन बिन,डरीं न सगुन हर‌इँयां।…